आध्यात्मिक–दार्शनिक अनमोल रचना : अंतर्यामी माँ आत्मा की ज्योति, करुणा, ज्ञान और शक्ति का संगम Adhyatmik–Darshanik Anmol Rachana: Antaryaami Maa Aatma Ki Jyoti, Karuna, Gyaan aur Shakti Ka Sangam

आध्यात्मिक–दार्शनिक अनमोल रचना : अंतर्यामी माँ आत्मा की ज्योति, करुणा, ज्ञान और शक्ति का संगमAdhyatmik–

Darshanik Anmol Rachana: Antaryaami Maa Aatma Ki Jyoti, Karuna, Gyaan aur Shakti Ka Sangam

यह रचना माँ को करुणा, ज्ञान, शक्ति और दिव्य चेतना का संगम बताती है। जीवन के अंधकार, भ्रम और अकेलेपन में माँ का स्मरण ही प्रकाश, शांति और मार्गदर्शन देता है। वह केवल जन्मदात्री नहीं, बल्कि आत्मा की ज्योति और जीवन की सच्ची पथप्रदर्शक है।

माँ केवल जननी नहीं बल्कि करुणा ज्ञान, शक्ति और दिव्य चेतना की प्रतीक है। आध्यात्मिकता और आत्मसंवाद से भरे जीवन में जब अंधकार, निराशा, भ्रम और अकेलापन मन को घेर लेते हैं, तब मातृत्व से प्राप्त प्रकाश, मार्गदर्शन और शांति जीवन को धन्य बना देते हैं।

माँ वह ज्योति है जो जीवन के अंधकार में दिशा दिखाती है। जब मन निराशा और असमंजस में डूब जाता है, तब मातृत्व की कोमल छाया हमें सहारा देती है। उसका स्नेह आत्मा को स्थिरता देता है, उसका आशीर्वाद आत्मविश्वास जगाता है और उसका मौन भी मार्गदर्शन बन जाता है क्योंकि माँ संयम भी है और संघर्ष भी।

भारतीय संस्कृति में माँ को देवी के समान माना गया है। माँ दुर्गा शक्ति की प्रतीक हैं माँ सरस्वती ज्ञान की अधिष्ठात्री हैं माँ लक्ष्मी समृद्धि और सौभाग्य का स्वरूप हैं इसी प्रकार सांसारिक माँ भी इन सभी दिव्य गुणों का संगम होती है।

मातृत्व वह प्रकाश है जो जीवन को दिशा देता है, वह शांति है जो भीतर की उथल-पुथल को शांत करती है और वह प्रेम है जो निस्वार्थ अनंत और पवित्र होता है। संसार चाहे साथ छोड़ दे पर माँ की करुणा और दया कभी साथ नहीं छोड़ती।

माँ मौन रहकर भी सब कह जाती है आँखों से ही आशीषों की वर्षा कर जाती है यदि मैं चुप रहूँ और कुछ न बोलूँ तो भी समझ लेना मैं तेरे ही हृदय में बसी रहती हूँज़रा झाँक कर देख अपने अंतर मेंमैं तेरे हर श्वास के आस-पास ही रहती हूँ।

जब जीवन कठिन परिस्थितियों मानसिक द्वंद्व और असमंजस से घिर जाता है जब अज्ञान अवसाद और भ्रम मन को आच्छादित कर लेते हैं तब माँ का स्मरण प्रकाश बनकर सारे अंधकार को दूर कर देता है।

रात का अंधेरा ठंडी हवाएँ सुनसान मार्ग ये सब जीवन की जटिलताओं के प्रतीक हैं। पर तन्हाई में भी माँ की स्मृति शांति देती है। वह संयम धैर्य और आशा की किरण बनकर हमारे भीतर जीवित रहती है हवा हमें चलना सिखाती है रात हमें ठहरना सिखाती है और उषा हमें पुन आरंभ करना सिखाती है यही जीवन की लय है।

जीवन रहस्यमय है कभी धुंधला कभी स्पष्ट कभी प्रश्नों से भरा तो कभी उत्तरों से। परंतु अंधकार में ही प्रकाश की पहचान होती है। तन्हाई भी शिक्षक बन जाती है। जब मनुष्य भ्रम और अकेलेपन के बीच खड़ा होता है तब माँ गुरु और ईश्वर का स्मरण उसे संबल और दिशा देता है।

माँ केवल शरीर की जन्मदात्री नहीं बल्कि आत्मा की पथप्रदर्शक है। वह संरक्षण है सुरक्षा है विश्वास है जीवन के संघर्षों में वही हमारा अदृश्य आधार बनकर हमें संभालती है।

माँ केवल जननी नहीं बल्कि करुणा ज्ञान शक्ति और दिव्य चेतना की प्रतीक है क्योंकि आध्यात्मिक और आत्मसंवाद से भरी हुई भाव जीवन के अंधकार निराशा भ्रम और अकेलेपन से पर मातृत्व से जो प्रकाश मार्गदर्शन और शांति के लिए मिलता है वो प्रकाश जीवन को धन्य बना देता है!

माँ वह ज्योति है जो जीवन के अंधकार में मार्ग दिखाती है। जब मन निराशा भ्रम और अकेलेपन से घिर जाता है तब मातृत्व की कोमल छाया हमें सहारा देती है। उसका स्नेह आत्मा को स्थिरता देता है उसका आशीर्वाद आत्मविश्वास जगाता है और उसका मौन भी मार्गदर्शन बन जाता है क्योंकि माँ संयम भी है और संघर्ष भी!

हमारे भारतीय संस्कृति में माँ को देवी के समान माना गया है जैसे माँ दुर्गा शक्ति की प्रतीक हैं माँ सरस्वती ज्ञान की अधिष्ठात्री हैं, और माँ लक्ष्मी समृद्धि और सौभाग्य का स्वरूप हैं। तथा वेद माता वेदों की ज्ञान है उसी प्रकार सांसारिक माँ भी इन सभी गुणों का संगम होती है।

मातृत्व वह प्रकाश है जो जीवन को दिशा देता है, वह शांति है जो भीतर की उथल-पुथल को शांत करती है और वह प्रेम है जो निस्वार्थ, अनंत और पवित्र होता है इस जग सब साथ छोड़ देता है पर माँ कि करुणा दया कभी साथ नहीं छोड़ती, चुप रहा कर कुछ ना बोलकर मैं तेरे हृदय में रहती हूँ जरा झांक कर देख अपने अंतर मैं मैं तेरे आस पास में रहती हूं!

मातृत्व वह प्रकाश है जीवन को दिशा देता है वह शांति है जो मन की उथल-पुथल को थाम लेता है वह प्रेम है निस्वार्थ,अनंत और निर्मल जो हर पीड़ा को अपने आँचल में समेट लेता है जग चाहे साथ छोड़ दे राहों के मोड़ दे पर पर माँ की करुणा कभी साथ नहीं छोड़ती।

माँ मौन रहकर भी सब कह जाती है आँखों से ही आशीषों की वर्षा छोड़ जाती है चुप रहा कर कुछ न बोलूँ तो भी समझ लेना मैं तेरे ही हृदय में बसी रहती हूँ ज़रा झाँक कर देख अपने अंतर में मैं तेरे हर श्वास के आस-पास ही रहती हूँ। 

जब जीवन कठिन परिस्थितियों का सामना करते हुए मानसिक द्वंद्व और असमंजस से घिर जाता है तो आंधी अंधेरा संघर्ष अज्ञान अवसाद भ्रम अस्पष्टता सब घेर लेते है पर माँ से प्रार्थना करने पर वह सारे अंधकार को दूर कर प्रकाश भर देती है

जब मनुष्य कर्म जिम्मेदारी और जीवन-संघर्ष से थका जाता है तो रातों की ठंड सुनसान नदी और आकाश ये सभी आंतरिक अकेलेपन के प्रतीक बनकर उदासियों की तनहाई में ढकेल देते है पर तन्हाई में भी माँ की याद शांति देती है माँ स्मृति बनकर जीवन को संयम और धैर्य देती है माँ अंधकार में आशा की किरण है।

ये जीवान प्रकृति की गोद में बैठा है लेकिन फिर भी सब कुछ रहस्यमय है क्योंकि रात जीवन का गूढ़ सत्य है मुस्कान भरी बातें कठिनाइयों में छिपा सौंदर्य है क्योंकि यह जीवन स्वीकार करता है कि जीवन को समझना आसान नहीं एक कठिन परीक्षा है!

जीवन का धुंधलापन निर्णय न ले पाने की स्थिति है जहां अंधेरा पहेली जैसा प्रश्न करता है और उत्तर पूछता है और तारे आशा के छोटे-छोटे संकेतो से मन को विश्वास दिलाता है कि जीवन कठिन होते हुए भी अलौकिक और सुंदर है।

 जीवन की गति के प्रतीक तो प्रकृति की हवाएँ ठंड गर्मी है ये रात की रवानी है जीवन की अनोखी चाल है जब जीवन इस चाल के गहराई को महसूस करता है तब अनुभव उसे चकित करता है इस लिए अंधेरी राते कभी कभी डरावनी लगती क्योंकि अंधकार में हम अपने भीतर में ही मिलते है!

हवा चलना सिखाती है और रात सिखाती है ठहरना तथा उषा सिखाती है फिर से आरंभ करना जिसे जीवन की लय कहते है अदृश्य पर सदा स्पंदित है जैसे मानो साधारण में ही कोई असाधारण रहस्य छिपा हो और उसे महसूस करने पर अनुभव को चकित कर देता है !

 यह संसार अलौकिक है जिसे समझने में समझ और विश्वास दोनों डगमगाते हैं जब माँ से ज्ञान मिलती है आसमान भी पास नजर आते है क्योंकि अनुभूति और आत्म-बोध दोनो माँ की शरण में है क्योंकि जीवन में अंधकार, भ्रम और पीड़ा स्वाभाविक हैं ईश्वर का स्मरण मनुष्य को मार्ग देता है तन्हाई भी शिक्षक बन जाती है और अंधेरों में ही प्रकाश की असली पहचान होती है!

 मानव स्वयं को कठिन परिस्थितियों में भ्रम और अकेलेपन के बीच खड़ा पाता है जहाँ चारों ओर निराशा अंधकार और कुहासा छाया हुआ है। ऐसे समय में वह अपनी माँ को स्मरण करता है, जो उसके लिए आशा शांति ज्ञान और प्रकाश का स्रोत है। क्योंकि जीवन के संघर्ष निराशा और मानसिक अंधकार से घिरे एक संवेदनशील मन की करुण पुकार है। 

 रात के अंधेरा ठंड की तन्हाई और प्रकृति के दृश्य जीवन की जटिलताओं और रहस्यों के प्रतीक हैं क्योंकि रहस्यों को समझने का प्रयास करना ही जीवन है परंतु असमंजस में पड़ रहना माँ से मार्गदर्शन की याचना है कि वह उसके जीवन से अज्ञान और निराशा को दूर कर प्रकाश भर दे। 

मनुष्य जीवान में भक्ति आत्मचिंतन और आध्यात्मिक अनुभूति का भावपूर्ण चित्रण यह है कि जो यह संदेश देता है कि कठिन समय में माँ गुरु ईश्वर का स्मरण मनुष्य को संबल और दिशा प्रदान करता है वही जीवन गुरु हैं जो सरंक्षण और सुरक्षा प्रदान करता है!

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