आध्यात्मिक दार्शनिक अनमोल रचना, जीवन का प्रवाह और मौन का सत्य Adhyatmik Darshnik Anmol Rachana, Jivan Ka Parwah OR Moun Ka Saty
जीवन में कुछ क्षण इतने सुंदर और भावपूर्ण होते हैं कि उन्हें शब्दों में बाँध पाना कठिन हो जाता है। वे क्षण चुपचाप हमारे सामने बहते रहते हैं जैसे नदी का शांत और गहरा प्रवाह। प्रेम भी ऐसा ही होता हैनिरंतर मौन और गहन। पर उस क्षण की सुंदरता और प्रेम के प्रवाह को समझ पाना सहज नहीं होता।
क्षणभंगुरता का सत्य यही है कि जीवन का प्रत्येक दृश्य अस्थायी है। जो आज है वह कल नहीं रहेगा। इसलिए हर क्षण को भावना और सजगता से देखना आवश्यक है, क्योंकि अनुभव ही उसे अर्थपूर्ण बनाता है। कभी-कभी मज़ाक में कही गई बात सत्य का रूप ले लेती है पर जो वास्तविक सत्य होता है वह प्रायः दिखाई नहीं देता उसे केवल महसूस किया जाता है।
जब मन के भीतर ज्ञान और अनुभूति का प्रकाश फैलता है, तब बाहरी आकर्षण स्वतः फीका पड़ने लगता है। मनुष्य भीतर की शांति और आत्मा की आवाज़ को सुनने लगता है। आंतरिक प्रकाश ही जीवन में सत्य न्याय और करुणा का बोध कराता है।
जीवन में अनेक उलझनें और सीमाएँ आती हैं। लोग सपनों और भावनाओं में उलझ जाते हैं पर सच्चा प्रेम दीपक की भाँति होता है जो परिस्थितियों की आँधियों में भी जलता रहता है। जीवन और प्रेम ऐसी गहराइयाँ हैं जिन्हें समझते-समझते समय बीत जाता है।
समय निरंतर बहता है उसे रोका नहीं जा सकता। जीवन भी उसी प्रवाह का अंश है। यदि हम समय के साथ चलना न सीखें, तो वही प्रवाह घाव बन जाता है।
सच्ची शांति बाहर नहीं बल्कि भीतर के मौन में मिलती है। जब मन शांत होता है तब आत्मा का साक्षात्कार होता है। मौन और आत्मचिंतन ही आत्ममंथन का मार्ग हैं, और जहाँ आत्ममंथन होता है, वहीं वास्तविकता का बोध जन्म लेता है।
जीवन सुंदर है पर उसे समझने के लिए संयम और धैर्य आवश्यक हैं। प्रेम ही जीवन का बंधन भी है और उसकी यात्रा भी। जैसे ध्यान में मन को देखा जाता है वैसे ही जीवन को भी शांति और जागरूकता से देखना चाहिए।
यह जीवन क्षणभंगुर है इसलिए हर क्षण को प्रेम और अनुभव से जीना चाहिए। सच्चा प्रेम शांत और गहरा होता है; उसे प्रदर्शन की आवश्यकता नहीं होती।
बाहरी संसार से अधिक महत्वपूर्ण है आंतरिक अनुभूति और आत्मिक शांति। समय को रोका नहीं जा सकता, पर उसे समझकर जिया जा सकता है।
जीवन में कुछ क्षण इतने सुंदर और भावपूर्ण होते हैं कि उन्हें शब्दों में बांध पाना कठिन होता है। क्योंकि वे क्षण चुपचाप हमारे सामने बहते रहते हैं, जैसे नदी का प्रवाह प्रेम भी ऐसा ही है शांत गहरा और निरंतर बहने वाला पर उस क्षण की सुंदरता और प्रेम का प्रवाह को समझ पाना बहुत कठिन हो जाता!
क्षणभंगुरता का सत्य यह है कि सब कुछ क्षणिक है क्योंकि जीवन का हर दृश्य अस्थायी है। जो आज है, वह कल नहीं रहेगा। इसलिए हमें हर क्षण को भावना और अनुभव से देखना चाहिए, क्योंकि वही उसे अर्थपूर्ण बनाता है कभी कभी मजाक में कहीं हुई बात भी सत्य में परिवर्तित हो जाती है पर वो सत्य नहीं होता किन्तु जो सत्य होता है वो दिखता नहीं!
जब मन के भीतर ज्ञान और अनुभूति का प्रकाश फैलता है, तब बाहरी दुनिया का आकर्षण कम हो जाता है। मनुष्य अंदर की शांति और आत्मा की आवाज को देखने लगता है क्योंकि आंतरिक अनुभूति का प्रकाश जीवन को सत्य न्याय और करुणा को देखने की कोशिश करने लगता है!
जीवन में कई उलझनें और सीमाएँ आती हैं। लोग सपनों और प्रेम में उलझ जाते हैं, लेकिन सच्चा प्रेम दीपक की तरह होता है जो जलता रहता है, चाहे परिस्थितियाँ कैसी भी हों जीवन उलझन और प्रेम एक ऐसी दुनियां जिसे समझते समझते समय निकल जाता !
समय निरंतर बहता रहता है। मनुष्य चाहकर भी उसे रोक नहीं सकता। जीवन भी उसी प्रवाह का हिस्सा है। हमें समय के साथ चलना सीखना चाहिए क्योंकि समय के प्रवाह में नहीं बहने पर ये जीवन घाव बन जाता है
सच्ची समझ और शांति बाहर नहीं, बल्कि भीतर के मौन में मिलती है। जब मन शांत होता है, तब आत्मा का दर्शन होता है। क्योंकि मौन और आत्मचिंतन में ही आत्ममंथन होता है और जहां आत्ममंथन होता है वहां वास्तविकता को ढूंढा जाता है!
जीवन सुंदर है, परंतु उसे समझने के लिए संयम और धैर्य आवश्यक है। प्रेम ही जीवन का बंधन भी है और यात्रा भी क्योंकि जैसे ध्यान में मन को देखा जाता है वैसे ही जीवन को भी संयम और शांति से देखा जाता जीवन आने जाने वाली परिवर्तन क्यों कैसे क्या लेकर आती जाती है!
यह जीवन क्षणभंगुर है, इसलिए हर क्षण को प्रेम और अनुभव से जिया जाना चाहिए क्योंकि सच्चा प्रेम शांत और गहरा होता है, उसे दिखावे की आवश्यकता नहीं होती।
बाहरी संसार से अधिक महत्वपूर्ण आंतरिक शांति और आत्मा की अनुभूति है समय को रोका नहीं जा सकता, पर उसे समझकर जिया जा सकता है।
जीवन के सुंदर और क्षणभंगुर पलों की गहराई को व्यक्त करती है। प्रेम और जीवन दोनों चुपचाप बहते रहते हैं, जैसे समय का प्रवाह है मनुष्य उन्हें रोक नहीं सकता, केवल अनुभव कर सकता है।
बाहरी दुनिया से अधिक महत्वपूर्ण आंतरिक अनुभूति और आत्मिक शांति है। जीवन में उलझनें, सपने और प्रेम आते हैं, परंतु सच्ची समझ मौन, संयम और आत्मचिंतन से मिलती है।अंततः जीवन सुंदर है, पर उसे समझने के लिए प्रेम, धैर्य और भीतर की दृष्टि आवश्यक है।
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