यह गीत जीवन को एक गहरे सागर के रूप में प्रस्तुत करती है, जिसमें मनुष्य स्वयं को असहाय अनुभव करता है। सुबह और प्रकाश यहाँ ज्ञान, आशा और नई शुरुआत के प्रतीक हैं। जब जीवन में अज्ञान रूपी अंधकार दूर होता है, तब सत्य और आत्मज्ञान का उदय होता है। कवि बताते हैं कि धीरे-धीरे जीवन के गूढ़ रहस्य खुलते हैं और मन की परतें हटती हैं। इस जागरण में दिव्य शक्ति और माँ का विशेष स्थान है। माँ केवल जन्मदात्री नहीं, बल्कि ईश्वर स्वरूप मार्गदर्शक शक्ति है, जो कठिन समय में हाथ पकड़कर सही मार्ग दिखाती है। गीत का मूल संदेश यह है कि जीवन एक यात्रा है, जिसमें दुख-सुख, मिलन-विरह सब आते हैं। अंततः मनुष्य को विश्वास, भक्ति और सकारात्मकता के साथ जीवन जीना चाहिए और हर नए प्रभात को आशा के रूप में स्वीकार करना चाहिए। आध्यात्मिक दार्शनिक अनमोल गीत,उतरा जीवन के सागर में ना मैं केवट खेवना, #Aaee Subah Jab Roshanee To Roshanee Lekar Aaee Writer ✍️ #Halendra Prasad,

   

गीत =} #उतरा जीवन के सागर में ना मैं केवट खेवना  

  #Aaee Subah Jab Roshanee To Roshanee Lekar Aaee

 Writer ✍️ #Halendra Prasad 

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     आई सुबह सुबह जब रोशनी तो प्रकाश लेकर आई 

       चांदनी ज्योति की उजाला में प्रभात लेकर आई 

     चमक दमक के साथ में आई सूरज को घर बुलाई 

            छुपा दिया चन्दा को दीप्ति रंग मुसकाई  

 नवजीवन शुरुआत हुआ था नया अवसर का साथ मिला

   आश और संकेत के संग में तम की दुनियां दूर हुआ 

       जग गई सब सृष्टि सोकर चिड़िया गीत गाती है

       अपने अपने कार्यों में सब अपने जगाती है

   आई सुबह सुबह जब रोशनी तो प्रकाश लेकर आई 

    चांदनी ज्योति की उजाला में प्रभात लेकर आई 


    जीवन की कुछ बातों को अब धीरे धीरे बतलाती है

     हटा दिया घूंघट को द्वार से देखो अब मुस्काती है

      जीवन का रहस्य दिखाई गुप्त गूढ़ के साथ में

  कठिन जटिलता दिखन लगे है प्यासो की सौगात में

 मतलब सार भीतर की बातें भेद दिलों का खोल दिया

     जान ना पाया जो बाते उसकी राजे तोल दिया 

    मन भावना को सामने रखदी थाली संग सजाके

    सत्य भाव की पोल खोली है आत्मा को जगा के

  आई सुबह सुबह जब रोशनी तो प्रकाश लेकर आई 

    चांदनी ज्योति की उजाला में प्रभात लेकर आई 


   दिव्य शक्ति का ज्ञान दिया मुझे ओझल को दिखाया 

      छुपा हुआ था जो घुंघट में उसको बाहर लाया

     प्रकट किया वो उसको जो व्यक्त ना हो पाता था

    देख लिया मै उसको जो तिरोहित रूप दिखाता था

     भक्ति शक्ति भाव दिया मुझे ईश्वर की भावना से

  पूर्ण रूप में दिखा दिया मुझे दिल की दर्द खिलौना से

   देवी की शक्ति थी ऐसी सब विघ्नों को साफ किया

     हाथ पकड़ ली मेरी मईया मेरे को बिंदास किया

  आई सुबह सुबह जब रोशनी तो प्रकाश लेकर आई 

    चांदनी ज्योति की उजाला में प्रभात लेकर आई 


     सीधे सीधे देखता था मैं रूप और स्वरूप को

     बनी रहती शक्ति माँ की मुझपर सब जोग को

      जब जब पुकारा था मैं माता चली आती थी

       पूछ लेती विपत्ति मुझसे रास्ता बताती थी

     अलविदा कहना किसी को दूर नहीं होना है

       जीवन की अंत का ये अजबे खजाना है

       अवसर मिलता सबको एक दिन जाना है

    जीवन की विदाई में वो खुशी की गीत गाना है

आई सुबह सुबह जब रोशनी तो प्रकाश लेकर आई 

    चांदनी ज्योति की उजाला में प्रभात लेकर आई 

गीत =} #उतरा जीवन के सागर में ना मैं केवट खेवना  

  #Aaee Subah Jab Roshanee To Roshanee Lekar Aaee Writer ✍️ #Halendra Prasad 

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टिप्पणियाँ

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