यह गीत एक भक्त की हृदयस्पर्शी पुकार है, जो संसार में फैले दुख, पाप, अन्याय और कष्टों को देखकर व्यथित है। उसका हृदय टूट रहा है, इसलिए वह माँ शक्ति से विनती करता है कि वह रक्षक और संरक्षिका बनकर प्रकट हों।गीत में माँ के विभिन्न दिव्य रूपों-काली, दुर्गा, लक्ष्मी, चंडी, भैरवी, सरस्वती का सुंदर वर्णन है। माँ कहीं दुष्टों का संहार करने वाली शक्ति हैं तो कहीं करुणा, प्रेम और ममता की सागर। वह सत्य, न्याय और धर्म की प्रतीक हैं तथा भक्तों के दुखों को समझकर उन्हें दूर करती हैं। कवि अपने दिल से बताता है कि माँ की शक्ति का गुणगान केवल मनुष्य ही नहीं, बल्कि पूरी प्रकृति करती है। माँ ज्ञान, साहस, प्रकाश और शांति का स्रोत हैं। माँ बच्चों और भक्तों की भावनाओं को जानती हैं और स्नेह, दया तथा कृपा से उनके जीवन को संवारती हैं। माँ के सर्वव्यापी, करुणामयी और शक्तिशाली स्वरूप का भक्ति-भाव से किया गया स्तवन है, जिसमें कवि संसार के कल्याण और अपने टूटे हृदय की शांति के लिए माँ का आह्वान करता है ।भक्ति शक्ति आराधना प्रार्थना भजन कीर्तन अर्चन आध्यात्मिक, गीत मोर दिलवा टूटल जाता देखके जुगवा रे, #Mor Dilava tutal Jata Ki Dekhake Jugava Re , Writer ✍️ #Halendra Prasad,
#Mor Dilava tutal Jata Ki Dekhake Jugava Re
Writer ✍️ #Halendra Prasad
BLOGGER=} 🙏♥️ #मेरी_हृदय_मेरी_माँ ♥️🙏
🙏❤️ #Meri_Hriday_Meri_Maa❤️🙏
की आजा रक्षक बनके माई तू संरक्षिका रे
मोर दिलवा टूटल जाता देखके जुगवा रे
तेरी चित्रण का मैं कहानी सुना वेद पुराणों मे
काली दुर्गा लक्ष्मी तू है तूही है अरमानों में
चंडी बनकर आती माँ चामुण्डा बनकर आती है
कलिका बनकर आती माँ तू भैरवी बनकर आती है
दुष्टों की संघार करे तू अग्नि-रूप दिखाती है
काट देती तलवारों से माँ दुष्टों को धूल चटाती है
कोमल कोमल प्रेमी तू है करुणा की सागर
दया धाम की मधुर बाणी है मधुर तेरा है रूप
की आजा रक्षक बनके माई तू संरक्षिका रे
मोर दिलवा टूटल जाता देखके जुगवा रे
कुदरत भी गाता है माई शक्ति की गुणगान तेरी
सच्चे पुत की हृदय में रहती बुद्धि है बलवान तेरी
आगमन से आनंदित करती दिल के अन्दर रहती माँ
सूरज की किरणों के जैसा रोशनी जग में भर्ती माँ
पूजते है चरणों को तेरी पंचरा तुझे सुनाते है
जीवन की खुशियों को मांगकर दुख में भी इतराते है
ममता की सागर है माँ तू आत्मा की माता
मोह माया की प्रेम है माँ तू जीवन की छाया
प्रेम तेरी अनमोल है माता प्रीत तेरी है प्रीतम
दया भाव की नरमी है माँ कोमलता कि आमत
की आजा रक्षक बनके माई तू संरक्षिका रे
मोर दिलवा टूटल जाता देखके जुगवा रे
सत्य न्याय और धर्म शक्ति की तूही है प्रतीक माँ
तलवारों से संकट हरती तूही है दिल गीत माँ
अग्नि रूप में आती माँ तू ज्वाला रूप में आती है
रौद्र रूप में आती माँ गंगा बनके आती तू
दुख पाप भय को नष्ट करे तू महाकाल बन जाती
ज्वाला रूप में जलकर मईया असली रूप दिखाती
दया भाव की जननी माँ तू कृपा तेरा अनमोल है
करती है महसूस दुःख को जीवन की तू मोल है
भीषण रूप दिखाकर आती दुर्जन को भगाती है
अनुकम्पा की दया भाव में अक्सर दुख में आती
की आजा रक्षक बनके माई तू संरक्षिका रे
मोर दिलवा टूटल जाता देखके जुगवा रे
संवेदना की साहस माँ तू भला करने की इच्छा तेरी
प्रेम भरा है जग में तूने जग की तू इच्छ मेरी
बच्चों की तू भाव जाने माँ भक्तों की तू इच्छा
भावुकता से भर देती है आँख में दिल की इच्छा
कष्टों की तू नाश करे माँ नाशवान कहलाती
वीणा बजा कर गाती है जब सरस्वती बन जाती
कोमल कोमल प्यार से माता जग तूने सिंचा
गंगा जमुना की लहरों से शान्ति बीज को सिंचा
स्नेह तेरा कोई भूल ना पाए सबकी हृदय में रहती तू
फूल सुगन्ध हवा बनके माँ दिल के अन्दर रहती तू
की आजा रक्षक बनके माई तू संरक्षिका रे
मोर दिलवा टूटल जाता देखके जुगवा रे
गीत =} #मोर दिलवा टूटल जाता देखके जुगवा रे
#Mor Dilava tutal Jata Ki Dekhake Jugava Re
Writer ✍️ #Halendra Prasad
BLOGGER=} 🙏♥️ #मेरी_हृदय_मेरी_माँ ♥️🙏
🙏❤️ #Meri_Hriday_Meri_Maa❤️🙏
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें