माँ संजीवनी चेतना का स्वरूप है जो टूटे हृदय और मुरझाए जीवन में नवप्राण भर देती है। वह केवल जन्मदात्री नहीं, बल्कि जीवन करुणा ज्ञान और मुक्ति की मूल शक्ति है। दुर्गा काली लक्ष्मी सरस्वती आदि रूपों में माँ सृष्टि की रचना पालन और संहार करती है। करुणामयी गंगा बनकर जीवन देती है और आवश्यकता पड़ने पर काली-चंडी बनकर अधर्म का नाश करती है। माँ ही ब्रह्म है, वही भक्ति, चेतना और मुक्ति है। उसकी शरण में जीवन पुनः आनंद और प्रकाश से भर उठता है।आध्यात्मिक दृष्टिकोण अमूल्य रचना माँ संजीवनी चेतना का अनंत स्वरूप और जीवन-मुक्ति की महाशक्ति, Maa Sanjeevanee Chetana Ka Anant Svaroop Aur Jeevan-Mukti Kee Mahaashakti,

  माँ संजीवनी चेतना का अनंत स्वरूप और जीवन-मुक्ति की महाशक्ति Maa Sanjeevanee Chetana Ka Anant Svaroop Aur Jeevan-Mukti Kee Mahaashakti

माँ केवल जन्म देने वाली नहीं।होती बल्कि जीवन चेतना शक्ति ज्ञान और मुक्ति का मूल स्रोत होती है। माँ मुरझाए हुए हृदय और जीवन को पुनः जीवित कर देती है क्योंकि जीवनदायिनी माँ का स्वरूप संजीवनी है 

जैसे संजीवनी मृत को भी जीवन दे देती है वैसे ही माँ का प्रेम और कृपा टूटे हुए मनुष्य को फिर से जीना सिखा सकती है।मनुष्य का हृदय पीड़ा निराशा या संसारिक चोटों से मरा हुआ-सा हो गया हो और वह माँ से उसे पुनर्जीवित करने की प्रार्थना कर रहा है। तो माँ उसकी पुकार सुन लेती है और अपने करुणा की संजीवनी उसके सारे दुख को हर लेती है!

माँ के विभिन्न दैवी रूप है दुर्गा काली भवानी लक्ष्मी जन्मदात्री, सुखदायिनी माँ सभी देवियों का समन्वित रूप है दुर्गा काली शक्ति रक्षा और अधर्म के विनाश की प्रतीक है भवानी वेद माँ ज्ञान और चेतना की जननी है लक्ष्मी माँ धन सुख और समृद्धि देने वाली शक्ति है जन्मदात्री माँ सृष्टि की मूल जननी है इस संसार में जो कुछ भी शुभ रक्षक और पोषक है वह सब माँ से ही उत्पन्न हुआ है।

माँ का वात्सल्य और ममता गंगा के समान है जो माँ गंगा के समान पवित्र शीतल और जीवनदायिनी है माँ अपने लहरों में लोरी सुनाती है बच्चे को पालने की तरह संसार को झुलाती है संगीत हवा प्रकाश चाँदनी सब माँ के रूप हैं क्योंकि यह प्रकृति स्वयं माँ का ही विस्तार है।

 माँ की मातृत्व शक्ति माँ की ममता और पालन-पोषण की शक्ति है माँ बाल-लीलाओं से मन को बहलाती है छोटी-छोटी खुशियों से जीवन को रंग देती है हृदय में स्थायी रूप से निवास करती है माँ जैसा स्वभाव संसार में किसी का नहीं हो सकता क्योंकि माँ ईश्वर की सबसे सुंदर रचना है।

जब माँ का रौद्र और विनाशकारी रूप काली महाकाली बनकर रुद्र रूप दिखाती है तो प्यार जग में माँ का प्रलयंकारी रूप सामने आता है जब अधर्म बढ़ता है तब वही करुणामयी माँ चंडी बनती है काली बनकर विनाश करती है मृत्यु और भय का अंत करती है क्योंकि माँ केवल स्नेह नहीं है बल्कि न्याय और संतुलन की शक्ति भी है।

माँ ही सम्पूर्ण ब्रह्म है माँ ही ब्रह्मा विष्णु त्रिपुरारी है माँ ही सृष्टि की रचिता ब्रह्मा माँ ही पालन करनेवाली विष्णु और संहार करनेवाली शिव है तीनों शक्तियाँ माँ में ही समाहित हैं सीता गीता शारदा ये सब माँ चेतना के विभिन्न रूप हैं।

माँ ही जीवन है माँ ही चेतना है माँ ही मुक्ति है माँ ही भक्ति है माँ सृष्ठी दृष्टि और हृदय है माँ से केवल सांसें नहीं चलती बल्कि बल बुद्धि उजास आत्मिक प्रकाश बंधन से मुक्ति मिलती है।

माँ व्यक्तिगत भी है और ब्रह्मांडीय महाशक्ति दोनों रूपों में विद्यमान है टूटे हुए मनुष्य की करुण पुकार है जो मरे हुए दिल को जीवित पुनः जीवित कर देती है माँ की गहन श्रद्धा और आत्मिक जुड़ाव इस जीवन से जुड़ा है जो भक्ति और दर्शन का संगम है!

 माँ को जीवन चेतना और शक्ति का मूल स्रोत और भक्ति-काव्य है माँ को संजीवनी के रूप में तन मन में विद्यमान रहती है, जो मरे हुए हृदय और टूटे हुए जीवन में पुनः प्राण फूंक कर जीवित कर देती है माँ ही जन्म देने वाली पालन करने वाली सुख-दुख हरने वाली और ज्ञान प्रदान करने वाली है।

 माँ के कोमल और वात्सल्यपूर्ण रूप के साथ-साथ उसके उग्र और विनाशकारी स्वरूप चित्रण भी है वह गंगा बनकर जीवन देती है।लोरी बनकर सुलाती है और आवश्यकता पड़ने पर काली-चंडी बनकर अधर्म का नाश करती है। माँ को दुर्गा लक्ष्मी सरस्वती भवानी काली सीता और शारदा जैसे अनेक रूपों में विद्यमान रहती है!

माँ ही सृष्टि पालन हारी और संहार की परम शक्ति है और माँ में जीवन का सत्य निहित है माँ से बल बुद्धि प्रकाश और मुक्ति की कामना करने पर तथा माँ से अपने हृदय को पुनः जीवित करने की प्रार्थना पर संपूर्ण जीवन बाग बगीचों की तरह मुस्कुराने लगता हैं!


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