यह गीत जीवन को एक रणभूमि के रूप में प्रस्तुत करता है, जहाँ हर व्यक्ति संघर्षों से घिरा हुआ है। दुख, पीड़ा, भय और संकट ने मानव जीवन को कठिन बना दिया है। इन परिस्थितियों में मनुष्य की वास्तविक प्रकृति सामने आती है कोई धर्म, सत्य और करुणा का मार्ग अपनाकर राम बन जाता है, तो कोई अहंकार, क्रोध और स्वार्थ के वशीभूत होकर रावण बन जाता है। कवि बताता है कि लगातार संघर्ष मन, बुद्धि और आत्मा को झुलसा देता है। जब पीड़ा असहनीय हो जाती है, तब मानव वैराग्य और भक्ति की ओर मुड़ता है। राम-नाम, तप और साधना के माध्यम से जीवन को प्रेम और शांति का मार्ग मिलता है। इस गीत का मूल संदेश यह है कि नफरत और हिंसा से मुक्ति संभव नहीं। जीवन की इस लड़ाई में मनुष्य को स्वयं चुनना है कि वह राम का मार्ग अपनाए या रावण की वृत्ति। करुणा, संयम और प्रेम ही सच्ची मुक्ति का मार्ग हैं। भक्ति शक्ति आराधना प्रार्थना भजन कीर्तन अर्चन आध्यात्मिक गीत, कोई राम बन गया तो कोई रावण बन गया, #Koi Ram Ban Gaya To Use Ravan Ban Gaya, Writer ✍️ #Halendra Prasad,
#Koi Ram Ban Gaya To Use Ravan Ban Gaya
Writer ✍️ #Halendra Prasad
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की जीवन जीने की लड़ाई अब तो रण बन गया
कोई राम बन गया तो कोई रावण बन गया
भय भटकन की दुखों ने घेरा है चारों ओर से
संग्राम समर में जंग क्षीणी ताकत की मुठभेड़ में
किसने किसको मारा है किसने किसको जारा
संघर्ष समन्दर की लहरों से किसने किसे उबारा
दुख दर्दों की हाल में जीवन बिखर गया है
रंग चढ़ा है बल की ऐसी किसे कौन डरा है
की जीवन जीने की लड़ाई अब तो रण बन गया
कोई राम बन गया तो कोई रावण बन गया
निर्बलता की लज्जा ने अब दिल को घेर लिया है
दुख पीड़ा की संकट ने घावों को जन्म दिया है
जब जब आता तब तब चिंता लेकर आता है
आपदा विपदा के लहरों में संकट लेकर आता है
तकलीफ देता है तन मन को ये जीवन जंग बनाता
मुश्किल और मुसीबतों से ये मन की पीड़ा बढ़ाता
बुद्धि ज्ञान विफल कर देता अग्नि जैसा जलता है
जला देता सब हुनर जीवन का कितने रूप बदलता है
की जीवन जीने की लड़ाई अब तो रण बन गया
कोई राम बन गया तो कोई रावण बन गया
चोटों की दर्दों से अब तो सुखिया भी रो देता है
देखकर रोता आँख की पानी आहट भी रो देता है
असहाय हुआ जब मानव तन मन में एक उपाय किया
छोड़ दिया घर बार को जंगल को निवास किया
हाथ में डमरू बाजे डम डम माथे चन्दन लगाया
राम नाम के जप तप से जीवन को प्यार सिखाया
सोच जरा जीवन को अब कैसे जिया जाएगा
नफरत के बीजों पर अब मुक्ति पाएगा
की जीवन जीने की लड़ाई अब तो रण बन गया
कोई राम बन गया तो कोई रावण बन गया
गीत =} #कोई राम बन गया तो कोई रावण बन गया
#Koi Ram Ban Gaya To Use Ravan Ban Gaya
Writer ✍️ #Halendra Prasad
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