यह गीत प्रकृति और जीवन के गहरे संबंध को सरल और भावपूर्ण रूप में प्रस्तुत करता है। इसमें बताया गया है कि कुदरत कभी मनुष्य को खुशियाँ देती है तो कभी दुःख, और यही जीवन की स्वाभाविक प्रक्रिया है। जैसे कोई मधुर गीत सभी को आनंद देता है, वैसे ही प्रकृति अपने हर रूप ध्वनि, रंग, हवा और गति के माध्यम से जीवन को अनुभव और सीख प्रदान करती है।कवि प्रकृति को एक महान कलाकार मानते हैं, जो सृष्टि की रचना कर जीवन को अर्थ देती है। पत्तियों की सरसराहट, वातावरण की विविधता और भावनाओं का उतार-चढ़ाव जीवन के सुख-दुःख का प्रतीक हैं। गीत यह भी बताता है कि संवेदनशील और करुणामय हृदय ही प्रकृति के संदेश को सही रूप में समझ सकता है अंततः यह रचना यह संदेश देती है कि कला और प्रकृति दोनों जीवन के मूल आधार हैं। इनके साथ जुड़कर ही मनुष्य जीवन का वास्तविक आनंद, उद्देश्य और आत्मिक शांति प्राप्त कर सकता है। आध्यात्मिक दर्शनिक भक्ति शक्ति आराधना प्रार्थना भजन कीर्तन अर्चन गीत, देता खुशियों को कुदरत कभी कभी गम देता है, #Khushiyon Ko Kudarat Kabhee Kabhee Gam Deta Hai, Writer ✍️ #Halendra Prasad,

 

गीत=} #देता खुशियों को कुदरत कभी कभी गम देता है  

#Khushiyon Ko Kudarat Kabhee Kabhee Gam Deta Hai 

           Writer ✍️  #Halendra Prasad 

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              जैसे गीत का आनन्द सबको मोद देता है

           देता खुशियों को कुदरत कभी कभी गम देता है

           कुदरत का मिजाज है कुदरती सहज रूप में

           स्वर से आनंदित करता दुनियां को प्रकृति में

            मधुर गीत गाता है सुनाता दिल के राग को

             समझ में आता जब देखे दिल विहार को 

       पत्तों और पत्तियों से जब मंद ध्वनि फुसफुसाता है

          स्वर मधुर है क्यों इतना जीवंत को बताता है 

           जैसे सृष्टि दिखती है वैसे जीवन दिखता है 

       समझ ना पाता कोई इसको दरबदर भटकाता है

           जैसे गीत का आनन्द सबको मोद देता है

       देता खुशियों को कुदरत कभी कभी गम देता है


       मन को भाता है हर गीत हर विषाद और खुशाद में

        कुदरत की कला बीच फंसा है दिल आकाश में

           गहरे सम्बन्ध से जब देखा मैं जीवन को

         व्यक्त करता है आत्मा प्रकृति के साथ को

           जीवन का उद्देश्य है आनन्द लेना देना

          सृजन प्रक्रिया से सब जीवन को सुनाना 

      लिख लिखकर मैं बांटू अब अपनी सृजन को

       सृष्टि की उत्पत्ति में मेरी रचना है आनन्द हो

          मेरे अस्तित्व में मेरे गुरुवर का प्रकाश है

       मेरे पास कुछ ना है सब उनका आशीर्वाद है

         जैसे गीत का आनन्द सबको मोद देता है

      देता खुशियों को कुदरत कभी कभी गम देता है


       दिल की अनुभूति में मेरा अनुभव मुझसे बोला

        समझ एहसास का संवेदना दिल को खोला 

        कितने कलाकार है इस दुनियां रंग विरंगी में

      कुदरत भी कलाकार है ये वातावरण की रंगी में

     हिलती डुलती पतियों से मैं हाल जीवन का सिखा 

     मर्मर स्वर करती है ये तो फुसफुस कर कुछ गाता 

     ऐसी गीत गाती है पत्तियां कुछ ठंडे कुछ गरम है

   देती है खुशियों का दम दम कुछ नरम कुछ कड़क है

  भाव भूमि जीवन का कहता संगीत कुदरत का जीवन है

     समझ इसे आत्मा से जोगी जीवन भी कुदरत है

          जैसे गीत का आनन्द सबको मोद देता है

      देता खुशियों को कुदरत कभी कभी गम देता है


          भावुक नाजुक मन कुदरत को ना समझे 

          कोमल नरम दिल से संवेदना पर अटके

           दुख ना देख पाता है वो दर्द में रो देता

      दयालु दिलदारी है वो कृपा में संवेदना जगाता

       अजबे प्रभावित होता आंख भरी आता है 

           रो देता दिल जब दर्द को देखता है

          मन की संवेदना प्रकृति को समझता 

      जीवन की भाषा जैसा कुदरत को दिखाता

          कला प्रकृति दोनों जीवन के स्रोत है

       इनके बिना जीवन ना जीवन भी प्रकृति है

       जैसे गीत का आनन्द सबको मोद देता है

   देता खुशियों को कुदरत कभी कभी गम देता है

गीत=} #देता खुशियों को कुदरत कभी कभी गम देता है  

#Khushiyon Ko Kudarat Kabhee Kabhee Gam Deta Hai 

           Writer ✍️  #Halendra Prasad 

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