यह गीत गुरु-शिष्य परंपरा के माध्यम से जीवन के मूल्यों की शिक्षा देता है। गुरु शिष्य को सिखाते हैं कि वाणी में संयम अत्यंत आवश्यक है क्योंकि शब्दों में अपार शक्ति होती है और असावधानी से बोले गए शब्द रिश्तों को तोड़ सकते हैं। इसलिए सोच-समझकर सत्य और मधुर वाणी का प्रयोग करना चाहिए।गीत यह संदेश देता है कि बुद्धि, आत्मबल और विश्वास से ही मनुष्य अपने जीवन को प्रकाशमय बना सकता है। सूर्य जैसी ऊर्जा और चंद्रमा जैसी शीतलता अपनाकर व्यक्ति अपने आचरण को सुंदर बना सकता है। गुरु बताते हैं कि असफलता अंत नहीं होती बल्कि निरंतर श्रम प्रयास और भक्ति से सफलता अवश्य मिलती है। आत्मविश्वास असंभव को भी संभव बना देता है और कर्म ही भाग्य का निर्माण करता है। काव्य में आलस त्यागकर संघर्ष का सामना करने विपत्तियों से न डरने और सत्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी गई है। अंत में यह स्पष्ट किया गया है कि सम्मान सदाचार और मधुर वाणी ही मनुष्य का सच्चा धन हैं न कि केवल पद या धन। आध्यात्मिक दर्शनिक भक्ति शक्ति आराधना प्रार्थना भजन कीर्तन अर्चन गीत, की कहता गुरु शिष्य की अद्भुत ये परम्परा जी, #Kee kahata Guru Shishy Kee Adbhut Ye Oarampara Jee, Writer ✍️ #Halendra Prasad,

 

गीत =} #की कहता गुरु शिष्य की अद्भुत ये परम्परा जी 

#Kee kahata Guru Shishy Kee Adbhut Ye Oarampara Jee

           Writer ✍️ #Halendra Prasad 

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        की कहता गुरु शिष्य की अद्भुत ये परम्परा जी

        बोलो मगर बोलने से पहले तौल तौल कर बोलो 

           होती शब्दों में शक्ति बिना सोचे ना बोलो

       बिगड़ जाते है रिश्ते सारे शब्दों के दुरूपयोग से

      मुर्ख अनाड़ी कहता लोगवा दर्द देता बड़ी जोर से

    सही गलत का फर्क कहता है सोच समझकर बोलो

      काम करेगा क्षमता दिल की अपनी आभा खोलो

    बल बुद्धि को तेज बनाओ तेज दिमाग से काम करो

         चमक उजाला दीप्ति अपने में प्रकाश भरो 

         सुन्दर सुन्दर शोभा मनके आत्मा में भर लो 

       सूर्य की जैसी रोशनी भरलो चांद सा शीतल हो

       की कहता गुरु शिष्य की अद्भुत ये परम्परा जी

      बोलो मगर बोलने से पहले तौल तौल कर बोलो 

           होती शब्दों में शक्ति बिना सोचे ना बोलो


               हार ना मानो आगे बढ़ते जाओ तुम

    प्रयास करो अब दिल से दिल को अब समझाओ तुम

        अंत नहीं है पतन चूक विफलता और नाकामी    

      कामयाब विजेता विजई होता श्रम चेष्टा की कामी 

         फलीभूत समृद्धि सिद्धि प्रसन्न प्रभावी बनाता

      फलदाई भाग्यशाली बनाता दिल में श्रम को भरता 

        फलता फूलता उन्नत है जिसकी वाणी मीठी हो

        सफल बनाता मेहनत जिसके दिल में भक्ति हो

     तैर जाता है पत्थर जल में विश्वास शक्ति की शक्ति से

   आत्मविश्वास की शक्ति असंभव को संभव करता शक्ति से

        की कहता गुरु शिष्य की अद्भुत ये परम्परा जी

        बोलो मगर बोलने से पहले तौल तौल कर बोलो 

           होती शब्दों में शक्ति बिना सोचे ना बोलो


    विश्वास जीवनका अमृत ऐसा जीवन का स्वरूप सजाता

    प्रचंड बाधा को पार करता है जीवन को खुशहाल बनाता

         बोझिल दिल ना होता इससे ना होता कमजोर 

        गंभीर गहन है इसकी शक्ति बल देता बड़ी जोर

            छोड़ आलस को किस्मत को तुम मोड़ो 

      भाग्य बनता है कर्मों से अब श्रम की बोली पकड़ो 

       त्याग दो उस आलस को जिसने तुम्हे मुरझाया

    बदल देगी किस्मत मेहनत अब श्रम से हाथ जोड़ाओ 

     आती जब विपत्ति कुछ अंदर संदेश लेकर आती

          दे जाती धन दौलत हंसी खुशी सब लाती 

       की कहता गुरु शिष्य की अद्भुत ये परम्परा जी

        बोलो मगर बोलने से पहले तौल तौल कर बोलो 

           होती शब्दों में शक्ति बिना सोचे ना बोलो


          भागकर जाओगे कहा मुसीबतों से बच के

          सामना करो अब तुम उलझनों से डट के

       जब जब भागोंगे मुसीबत पीछे पीछे आएगी

      उलझन में फंसाकर तुमको दिल से जलाएगी

      डट कर मुकाबला जब तुम समस्या से करोगे

            साथ समाधान देगा सत्य पर रहोगे 

          जीवन का चरित्र जब सम्मान को देता है

        आचरण का सच्चा धन सम्मान से मिलता है

      धन पद इज्जत ना दे बोली जिसकी मीठी ना हो

      बोली देता है सब कुछ चित्र जिसकी झूठी ना हो

       की कहता गुरु शिष्य की अद्भुत ये परम्परा जी

        बोलो मगर बोलने से पहले तौल तौल कर बोलो 

          होती शब्दों में शक्ति बिना सोचे ना बोलो

गीत =} #की कहता गुरु शिष्य की अद्भुत ये परम्परा जी 

#Kee kahata Guru Shishy Kee Adbhut Ye Oarampara Jee

           Writer ✍️ #Halendra Prasad 

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टिप्पणियाँ

मेरी हृदय मेरी माँ

अहंकार और इच्छाओं का त्याग करके सच्चे समर्पण और भक्ति से ही भगवान का अनुभव और जीवन का परम आनंद प्राप्त होता है क्योंकि यह भक्ति-गीत एक साधक की भगवान के प्रति गहरी पुकार जिज्ञासा और समर्पण को दर्शाता है वह बार-बार भगवान को याद करता है और उनकी लीला को समझना चाहता है लेकिन उसे स्पष्ट अनुभव नहीं हो रहा इसलिए वह प्रश्न करता है भक्त भगवान से प्रार्थना करता है कि उसका अहंकार भय स्वार्थ और चिंता मिटा दें और उसे अपने प्रेम व दिव्यता में लीन कर दें वह स्वीकार करता है कि इच्छाएँ और मोह उसे भ्रमित करते हैं और सच्चे ज्ञान से दूर कर देते हैं सच्चा आनंद और शांति केवल भगवान में ही है इसलिए वह उनसे आत्म-शुद्धि और ब्रह्म में विलीन होने की प्रार्थना करता है। आध्यात्मिक दार्शनिक अनमोल भक्ति शक्ति आराधना प्रार्थना भजन कीर्तन अर्चन गीत,भगवन कैसी तेरी लीला तू दिखाता काहे ना, #Bhagawan Kaisi Teri Lila Too Dikhata Kahe Naa, Writer ✍️ #Halendra Prasad ,

यह गीत जीवन के परिवर्तन आत्मचेतना और भगवान के रहस्य को समझने की एक आध्यात्मिक खोज को व्यक्त करता है।कवि इस गीत के माध्यम से भगवान से प्रश्न करता है कि वह पागल नहीं है बल्कि जीवन और चेतना के गहरे रहस्यों को समझने की कोशिश में भटक रहा है। संसार हर पल बदलता रहता है सुख-दुःख आशा-निराशा जन्म-मरण सब आते-जाते रहते हैं। मनुष्य बाहर की दुनिया को आँखों से देखता है लेकिन असली सत्य मन आत्मा और चेतना के भीतर छिपा है। यह जीवन कोई स्थिर चीज नहीं है बल्कि लगातार बदलने वाली प्रक्रिया है। जो व्यक्ति इस परिवर्तन को स्वीकार कर लेता है और भीतर की चेतना को समझने का प्रयास करता है वही जीवन के सच्चे अर्थ को जान पाता है। आध्यात्मिक दार्शनिक अनमोल भक्ति शक्ति आराधना प्रार्थना भजन कीर्तन अर्चन गीत, भटका चेतना के सागर में ना मैं पागल भगवन, #Bhatka Chetna Ke Saagar Mein Na Main Paagal Bhagwan, Writer ✍️ #Halendra Prasad,

यह रचना बताती है कि अत्यधिक सोच और अतीत में जीना मनुष्य को उलझन में डाल देता है जबकि विश्वास संतुलन और वर्तमान में जीना जीवन को सरल बनाता है कवि अपने मन की बेचैनी यादों निर्णयहीनता और मानसिक संघर्ष को माँ के सामने व्यक्त करता है। कवि बीती हुई बातों और पुरानी यादों में इतना उलझ गया है कि उसे रातों में नींद नहीं आती और वह सही-गलत तथा जीवन के प्रश्नों में खो जाता है कवि हर बात को बहुत गहराई से सोचता है, जिसके कारण वह छोटे-छोटे निर्णय भी नहीं ले पाता। यादें उसके मन को बार-बार विचलित करती हैं और उसकी कार्यक्षमता रुक जाती है। अंत में वह अपनी माँ से मार्गदर्शन, शांति और सहारा माँगता है। आध्यात्मिक दार्शनिक अनमोल भक्ति शक्ति आराधना प्रार्थना भजन कीर्तन अर्चन गीत, बड़ी उलझन में फंसी है मेरी प्राण रे माई #Badi Uljhan Men Fanshi Hai Meri Pran Re Mai,, Writer ✍️ #Halendra Prasad ,

यह रचना गुरु-भक्ति वैराग्य और आत्मज्ञान का सुंदर संदेश देती है कि संसार का सुख क्षणिक है जबकि गुरु का ज्ञान ही सच्ची मुक्ति का मार्ग है क्योंकि यह भक्ति गीत संसार की मोह-माया, धन, रूप, आकर्षण और वासना के जाल से सावधान करता है। गीत में मोह-माया को नागिन के रूप में दर्शाया गया है जो मनुष्य को सुंदरता और लालच के माध्यम से अपने बंधन में बाँधकर दुख देती है। मोह में फँसा इंसान भीतर से टूट जाता है और जीवन का सही मार्ग खो देता है गीत का मुख्य संदेश यह है कि केवल सच्चे गुरु की शरण और उनके उपदेश ही मनुष्य को इस भ्रमजाल से मुक्त कर सकते हैं। गुरु की निर्मल वाणी, ज्ञान और कृपा आत्मा को शांति प्रदान करती है तथा जीवन को सही दिशा देती है।सीआध्यात्मिक दार्शनिक अनमोल भक्ति शक्ति आराधना प्रार्थना भजन कीर्तन अर्चन गीत,मोह माया से मुक्त करते है सुने जो कहानी, #Moh Maya Se Mukt Kayre Hai Sune Jo Kahani, Writer ✍️ #Halendra Prasad,

आध्यात्मिक दार्शनिक अनमोल रचना,मानव और ब्रह्मांड की एकता का अनुभव, Manav Aur Brahmand Ki Ekta Ka Anubhav,

संघर्ष संतुलन और अवसर की खोज जीवन अवसर नहीं, चेतना की यात्रा, Sangharsh Santulan Aur Avasar Ki Khoj Jeevan Avasar Nahin, Chetna ki Yatra,

यह गीत जीवन के दर्द धोखे और अकेलेपन की भावना को व्यक्त करता है। कवि कहते हैं कि आज दुनिया दुख को नहीं समझ रही है और उसे एक तमाशा समझती है लेकिन एक दिन ऐसा जरूर आएगा जब लोग उनके दर्द को समझेंगे और पछताएँगे क्योंकि जीवन में कई लोग अपने स्वार्थ और गलत सोच के कारण दूसरों का दिल तोड़ देते हैं। इंसान कई बार अपने ही लोगों से ठोकर खाकर अकेला रह जाता है। फिर भी जीवन का विश्वास है कि जीवन में नफरत नहीं बल्कि प्रेम दया और करुणा ही सबसे बड़ी शक्ति है। ईश्वर सब कुछ देखता है और हर व्यक्ति को उसके कर्मों का फल जरूर मिलता है। इसलिए सच्चाई और प्रेम के रास्ते पर चलना ही जीवन का सही मार्ग है। आध्यात्मिक दार्शनिक अनमोल भक्ति शक्ति आराधना प्रार्थना भजन कीर्तन अर्चन गीत, मेरा दुःख जब देखेगा ना भूलेये दुनियां #Mera Dukh Jab Dekhegi Naa Bhooleye, ✍🏻#Write Halendra Prasad

जब हम स्वार्थ और तृष्णा से ऊपर उठकर निष्पक्ष और निर्मल दृष्टि से संसार को देखेंगे तब मनमस्ति और मुक्ति का अनुभव होगा क्योंकि स्वार्थ और लालसा जीवन को उलझाते हैं व्यक्ति अपनी इच्छाओं और मोह में फंसकर असली आनंद और शांति से दूर हो जाता है अवलोकन का दृष्टि अपनाना आवश्यक है क्योंकि स्वार्थ पक्षपात और मोह से ऊपर उठकर देखना ही मन को वास्तविक आनंद मनमस्ति देता है माया और लालच भ्रम फैलाते हैं वे अंदर की शक्ति बुद्धि और आत्मिक प्रकाश को ढक देते हैं।जीवन का उद्देश्य आत्मिक जागरण है और ज्ञान आत्मा का प्रकाश है और जीवन का दिव्य गुण ही असली सुख हैं।आध्यात्मिक दार्शनिक अनमोल भक्ति शक्ति आराधना प्रार्थना भजन कीर्तन अर्चन गीत, मनमस्त हो जाएगा जब तुम निरेखा करोगे, #Manmast Ho Jayega Jab Tum Nirekha Karoge, Writer ✍️ #Halendra Prasad,

आध्यात्मिक दार्शनिक अनमोल भक्ति रचना, सूर्य के तीन रूप और जीवन का दर्शन संतुलन ही शाश्वत सत्य, Surya Ke Teen Roop Aur Jeevan Ka Darshan Santulan Hi Shashvat Saty,

ये जीवन अनेक रंगों से भरा है, इसलिए हर परिस्थिति को स्वीकार करते हुए आगे बढ़ना ही जीवन का सार है। इस गीत के माध्यम से जीवन की सच्चाई को बहुत सुंदर ढंग से प्रस्तुत किया गया है। कवि बताते हैं कि जीवन एक आंधी की तरह है, जिसमें सुख-दुःख, हँसी-आँसू, आशा-निराशा जैसी सभी भावनाएँ आती-जाती रहती हैं। जैसे समुद्र की लहरें उठती और गिरती हैं, वैसे ही जीवन में भी परिवर्तन लगातार होता रहता है।कवि माँ को प्रकृति और सृष्टि की शक्ति के रूप में देखते हैं, जो मनुष्य को हर अनुभव से परिचित कराती है कभी खुशी देती है तो कभी दुःख। जीवन में कुछ भी स्थायी नहीं है, सब समय और परिस्थितियों के अनुसार बदलता रहता है।क्योंकि की मनुष्य को संघर्षों के बीच आशा, धैर्य और विश्वास बनाए रखना चाहिए। निरंतर अभ्यास और मेहनत से ही सफलता प्राप्त होती है। आध्यात्मिक दार्शनिक अनमोल भक्ति रचना भक्ति शक्ति आराधना प्रार्थना भजन कीर्तन अर्चन गीत, आती जाती है सब बातें इस जीवन के आंधी में, #Aati Jati Hai Sab Bate Is Kivan Ke Aandhi Mem, Writer ✍️ #Halendra Prasad,