यह गीत माँ ममता प्रकृति और बाल मन के आपसी संबंध को भावपूर्ण ढंग से प्रस्तुत करता है। कवि बताता है कि जहाँ प्रकृति शांत, कोमल और संतुलित है, वहीं माया रूपी माँ का वास है जो मन को शांति संयम और स्थिरता प्रदान करती है। दूसरी ओर बालक का मन चंचल जिज्ञासु और रंग-बिरंगे आकर्षणों की ओर सहज ही खिंच जाता है। खिलौने और चमकीले रंग उसे आनंदित करते हैं और उसके भीतर की निष्कलुष खुशी को प्रकट करते हैं। माँ की ममता में बालक का संपूर्ण व्यक्तित्व खिल उठता है और वह स्वयं प्रसन्न रहकर दूसरों को भी आनंद देता है। कवि इस विरोधाभास के माध्यम से जीवन और प्रकृति की सुंदर फितरत को दर्शाता है, जो उसे रहस्यपूर्ण और अद्भुत प्रतीत होती है। आध्यात्मिक दर्शनिक दृष्टिकोण अमूल्य भक्ति शक्ति आराधना प्रार्थना भजन कीर्तन अर्चन गीत, #जहां जल नीला फूल कोमल है वहां है माया का माता, #Jahaan Jal Neela Phool Komal Hai Vahaan Hai Maya Ka Mata, Writer ✍️ #Halendra Prasad,

 गीत =} #जहां जल नीला फूल कोमल है वहां है माया का माता 

#Jahaan Jal Neela Phool Komal Hai Vahaan Hai Maya Ka Mata

           Writer ✍️ #Halendra Prasad 

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    की कैसा कुदरत का फितरत मुझे समझ में ना आता

   जहां जल नीला फूल कोमल है वहां है माया का माता

           हल्के सौम्य शान्त है मन को शान्ति देते 

            संयम सजाकर संतुलन में ठहराव देते 

             तालमेल बढ़ाते है मेलजोल बढ़ाते है

           स्थिरिता की शक्तियां बराबर दिखाते है

             बनाती मजबूत वो समानता बराबरी 

              करती नियंत्रण आत्मा भावना को

   की कैसा कुदरत का फितरत मुझे समझ में ना आता

   जहां जल नीला फूल कोमल है वहां है माया का माता


           अजीब है कहानी इसकी विपरीत है अन्तर 

         बालक और प्रकृति का स्वभाव कितना सुन्दर

             चंचल है मन शिशुका उत्सुक भरा है 

            जानने की इच्छा वाले बेचैन में खड़ा है

     हैरानी विस्मय है खोज बिन पूछ ताछ की इच्छा 

           बेचैनी व्याकुलता कौतूहल पे आड़ा है

          सरल शांत रंगों जैसा अपेक्षा चटकीले है 

           विविध चमकदार है रंगों के ओर खड़े है 

   की कैसा कुदरत का फितरत मुझे समझ में ना आता

   जहां जल नीला फूल कोमल है वहां है माया का माता


        रंग विरंग खिलौने शिशु को भाता है बड़ी जोर 

        करता है आनंदित उसको दे जाता खुशी भोर

         तीव्र इच्छा को देखा मैने मन के भाव रमता 

            खेलने की खुशियों में वो जगमग करता

       खुशियों का सौंदर्य छिपा है अन्तर मन में उसके

   रंग विरंग खिलौने भाते उसको खींचते है अब दिल को

     भीतर का ईच्छा ना दिखाता मुखड़ा हंसता गाता 

       दे जाता है खुशियां सबको कितना सुन्दर दाता 

    की कैसा कुदरत का फितरत मुझे समझ में ना आता

   जहां जल नीला फूल कोमल है वहां है माया का माता


       रंगीन खिलौने देखकर बच्चा कुदरत सा मुस्काता 

          हल्के रंग घनेरे कुदरत जैसा हलचल लाता 

    बालक की दुनियां कितनी सुंदर जितनी उसकी रूप

       चँचल मन से भाव जगाता दे जाता सारा सुख

     मन मोहक मन रंग खिलौने मांगे मांगे ना कोई धन

        माँ ममता की खुशियों में खिलता सारा स्वरूप

           टिम टिम तारों के जैसा चमके बालक रूप

       शिशु का सुख रंगीन खिलौना दे जाता खुशी रूप

     की कैसा कुदरत का फितरत मुझे समझ में ना आता

    जहां जल नीला फूल कोमल है वहां है माया का माता

गीत =} #जहां जल नीला फूल कोमल है वहां है माया का माता 

#Jahaan Jal Neela Phool Komal Hai Vahaan Hai Maya Ka Mata

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