यह गीत भारत माँ के प्रति गहरी श्रद्धा, प्रेम और समर्पण की भावपूर्ण अभिव्यक्ति है। कवि स्वयं को भारत माता का वीर सपूत मानते हुए मातृभूमि को बार-बार प्रणाम करता है। गीत में भारत को केवल भूमि नहीं, बल्कि पालन-पोषण करने वाली करुणामयी माँ के रूप में प्रस्तुत किया गया है। नदियाँ, वर्षा, उपजाऊ मिट्टी और हरित खेत भारत की समृद्धि और जीवनदायिनी शक्ति के प्रतीक हैं, जो जन-जीवन को सुखमय बनाते हैं। भारत माँ मनुष्य के विचार, आचरण और आत्मा को शुद्ध कर उसे सत्य, विवेक और करुणा का मार्ग दिखाती हैं। समूचा गीत देशभक्ति, कर्तव्यबोध और आध्यात्मिक चेतना से ओत-प्रोत है, जो पाठक को मातृभूमि के प्रति निष्ठा, सेवा और पूर्ण समर्पण की प्रेरणा देता है। देश भक्ति मातृभूमि करुणा भक्ति शक्ति आराधना प्रार्थना भजन कीर्तन अर्चन गीत,भारत माँ का वीर सपूत हम भारत को प्रणाम करूं, #Bhaarat Maa Ka Veer Sapoot Ham Bhaarat Ko Pranaam Karu, Writer ✍️ #Halendra Prasad
गीत =} #भारत माँ का वीर सपूत हम भारत को प्रणाम करूं
#Bhaarat Maa Ka Veer Sapoot Ham Bhaarat Ko Pranaam Karu
Writer ✍️ #Halendra Prasad
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मातरम् मातरम् बन्दे मातरम् बन्दे मातरम्
नमन करु मैं मातृभूमि को बार-बार प्रणाम करूं
भारत माँ का वीर सपूत हम भारत को प्रणाम करूं
मंशा मेरी स्वर मेरा जीवन मेरा समर्पण है
भारत माँ की रक्षा में कर्तव्य मेरा अब अर्पण है
नदियां झीलें और तलाबे जल मुझको सब देती
वर्षा को पर्याप्त कराकर मातृभूमि में रखती
कमी ना होता जलका मुझको अन्नको खूब उपजाती माँ
कृषिकर्म से खेतों को सींचती भूमि पुत्र बनाती माँ
नमन करु मैं मातृभूमि को बार-बार प्रणाम करूं
भारत माँ का वीर सपूत हम भारत को प्रणाम करूं
मातरम् मातरम् बन्दे मातरम् बन्दे मातरम्
फसलें अच्छी होती है नस्लें अच्छी होती है
जन जीवन सुखमय बनाती जीवन अच्छी होती है
हरि भरी खेतों में देखा हरि भरी है दुनियां सारी
गूंज रहा था भारत मेरा गा रहा हरमुनियां प्यारी
जरखेज हमारी मिट्टी है फसलें अच्छी होती है
फलदायी उत्पादक है पैदावार कराती है
मातृभूमि की करुणा से मुझे जीवन नया मिला है
उन्नत विकसित खिला हुआ है भारत मेरा खिला है
नमन करु मैं मातृभूमि को बार-बार प्रणाम करूं
भारत माँ का वीर सपूत हम भारत को प्रणाम करूं
मातरम् मातरम् बन्दे मातरम् बन्दे मातरम्
मलय पर्वत से आती नदियां चंदन खुशबू लाती
शीतल मधुर सुगन्ध लाती है मन में शान्त भर्ती
शुद्ध करती है आचरण आत्मा मन पवित्र कर देती है
मलीनता दुष्ट भावों से मुझे शून्य खाली कर देती है
विचार वाणी और कर्म मेरा सब शुद्ध हो जाता है
रग रग में सब सत्य बस्ता है रग रग शीतल हो जाता है
दोष ईर्ष्या कपट मिटाती हानि ना पहुंचाती है
आत्मिक शान्ति भरकर मुझमें जीवन सुखद बनाती है
नमन करु मैं मातृभूमि को बार-बार प्रणाम करूं
भारत माँ का वीर सपूत हम भारत को प्रणाम करूं
मातरम् मातरम् बन्दे मातरम् बन्दे मातरम्
सत्व ज्ञान शान्ति देती ज्योति और प्रकाश देती
कर्म इच्छा चंचलता देती मन में करुणा भर्ती
अज्ञान आलस्य अंधकार हरे माँ बल बुद्धि मुझे देती है
विवेक देती करुणा से माता दया मुझमें भर देती है
आत्मचिंतन मेरा ढूंढ रहा है शांत संतुलित प्यार
मन को स्थिर निर्मल करता उज्ज्वलता कि धार
भारत माँ की चरणों में मैं अपना सिर झुकाऊ
सात्विक सत्य हमारी धरती गोद में सो जाऊ
नमन करु मैं मातृभूमि को बार-बार प्रणाम करूं
भारत माँ का वीर सपूत हम भारत को प्रणाम करूं
मातरम् मातरम् बन्दे मातरम् बन्दे मातरम्
मातरम् मातरम् बन्दे मातरम् बन्दे मातरम्
गीत =} #भारत माँ का वीर सपूत हम भारत को प्रणाम करूं
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