भारत माता करुणामयी माँ हैं जो प्रकृति के माध्यम से जीवन देती हैं। उनकी गोद में मनुष्य का मन, वाणी और कर्म पवित्र होते हैं। देशभक्ति, सेवा और पूर्ण समर्पण से ही सच्चा राष्ट्रप्रेम प्रकट होता है। आध्यात्मिक-दार्शनिक दृष्टि से अमूल्य रचना भारत माता की गोद में जीवन और कर्तव्य Aadhyaatmik-Daarshanik Drshti Se Amuly Anmol Rachana Bhaarat Mata Kee God Mein Geevan Aur Kartavy

 

भारत माता करुणामयी माँ हैं जो प्रकृति के माध्यम से जीवन देती हैं। उनकी गोद में मनुष्य का मन, वाणी और कर्म पवित्र होते हैं। देशभक्ति, सेवा और पूर्ण समर्पण से ही सच्चा राष्ट्रप्रेम प्रकट होता है। 

आध्यात्मिक-दार्शनिक दृष्टि से अमूल्य रचना भारत माता की गोद में जीवन और कर्तव्य Aadhyaatmik-Daarshanik Drshti Se Amuly Anmol Rachana Bhaarat Mata Kee God Mein Geevan Aur K

जो अपने जीवन के स्वर मन और कर्म को भारत माता के चरणों में समर्पित कर देता है वही देश की रक्षा को अपना परम कर्तव्य मानता है। भारत माता केवल रक्षा की पात्र नहीं बल्कि पालन-पोषण करने वाली करुणामयी माँ हैं जो नदियों वर्षा और उपजाऊ भूमि के माध्यम से अपने पुत्रों को अन्न जल और जीवन प्रदान करती हैं।

भारतवर्ष की पहचान कृषि और प्रकृति के सुंदर सामंजस्य से होती है। नदियाँ झीलें वर्षा और हरित खेत ये सभी भारत की समृद्धि और वैभव के प्रतीक हैं। उपजाऊ मिट्टी से उत्पन्न अच्छी फसलें जन-जीवन को सुखमय बनाती हैं और राष्ट्र को समृद्धि प्रदान करती हैं।

भारत की प्राकृतिक पवित्रता का अद्भुत वर्णन यह है कि मलय पर्वत से प्रवाहित नदियाँ चंदन-सी सुगंध अपने साथ लाती हैं जो मन आत्मा और आचरण को शुद्ध करती हैं। भारत माता की गोद में निवास करने से मनुष्य के विचार वाणी और कर्म पवित्र हो जाते हैं तथा ईर्ष्या कपट और अहंकार जैसे दोष स्वतः विलीन हो जाते हैं।

भारत माता ज्ञान, विवेक, करुणा और प्रकाश की दात्री हैं। वे अज्ञान और अंधकार को दूर कर मनुष्य को सत्य शांति और संतुलन के मार्ग पर अग्रसर करती हैं। अंततः वही मनुष्य पूर्ण आत्मसमर्पण का अधिकारी है, जो भारत माता के चरणों में शीश झुकाकर उनकी गोद में शांति से विश्राम करने की कामना करता है।

भारत माता हमारी मातृभूमि हैं जो आध्यात्मिक जुड़ाव, प्रकृति-संरक्षण और मानव-कल्याण का संदेश देती हैं। वे कर्तव्य, त्याग और सेवा की सतत प्रेरणा देने वाली माँ हैं। भारत माता को केवल भूमि नहीं बल्कि एक जीवित चेतना के रूप में देखना ही जीवन की सबसे बड़ी विशेषता है।

यह अभिव्यक्ति भारत माता के प्रति गहरी श्रद्धा प्रेम और पूर्ण समर्पण की भावना से ओत-प्रोत है। जो स्वयं को भारत माता का वीर सपूत मानकर बार-बार मातृभूमि को प्रणाम करता है वही सच्चे अर्थों में राष्ट्रभक्त है।

भारत माता केवल भू-खंड नहीं, बल्कि पालन-पोषण करने वाली जीवनदायिनी माँ हैं। नदियाँ वर्षा उपजाऊ मिट्टी और हरे-भरे खेत भारत की समृद्धि और चेतना के प्रतीक हैं, जो जन-जीवन को सुख संतुलन और सार्थकता प्रदान करते हैं।

भारत माता मनुष्य के विचार आचरण और आत्मा को शुद्ध कर उसे सत्य, विवेक और करुणा के पथ पर चलाती हैं तथा सेवा निष्ठा और पूर्ण समर्पण की प्रेरणा देती हैं।

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