संघर्ष जीवन का अनिवार्य हिस्सा है। धैर्य, विवेक और आत्मचिंतन से ही शांति, सफलता और आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त होती है।संघर्ष से शांति तक जीवन की सीख है और कांटो से भरे रास्ते पर अंत तक चलना की शांति की प्रतीक है, Writer, #Halendra Prasad, मेरी_हृदय_मेरी_माँ, Meri_Hriday_Meri_Maa,
संघर्ष से शांति तक जीवन की सीख है और कांटो से भरे रास्ते पर अंत तक चलना की शांति की प्रतीक है!
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डूबना केवल शारीरिक नहीं है बल्कि मानसिक भावनात्मक और आध्यात्मिक संघर्ष का संकेत है। जो जीवन में आए गहरे संकट का प्रतीक बनकर उभरता है। जब मनुष्य टूटने लगता है, तब वह बड़ी सोच यानी ईश्वर गुरु और आत्मचिंतन की ओर जाता है।
शिव संहार नहीं बल्कि कल्याण और चेतना के देव है
अर्थात संकट में मन ईश्वर की शरण लेता है। गंगासागर जीवन वह सागर गंगासागर जीवन वह सागर है जो पवित्र स्थल के साथ साथ गंगा नदी समुद्र से मिलती है और अक्सर जीवन में शुद्धि, पुण्य और अनंतता से जोड़ती है।
गंगासागर जीवन वह सागर है जो असीमित है, जिसमें अनुभव, ज्ञान, पुण्य और चुनौतियाँ भरी हैं शुद्धता और आध्यात्मिक उन्नति का स्रोत है।अलग-अलग धाराओं अनुभवों रिश्तों भावनाओं बना है और अंत में समग्र रूप से आत्मा और ज्ञान तक पहुँचता है।
यह जीवन सहज नहीं है दुख, संकट, विपत्ति निरंतर आती हैं
सुख क्षणिक है, संघर्ष स्थायी है कठिन है इसके डगर में इसकी संकट दुःख खड़ा है और यही जीवन को स्वीकार करती है कि संघर्ष से भागा नहीं जा सकता इसीलिए यह जीवन का मार्ग कंकड़, पत्थर और चट्टानों से भरा हुआ दर्शाता है ।
दिल डरता है रास्ता टेढ़ा लगता हैमन आकुल है परंतु उसी संघर्ष में शांति छिपी हुई है आत्मा पुकारती है रूह मार्ग दिखाती है
टकराव भी अजीब था संघर्ष भी अजीब था फिर भी मनुष्य का सबसे बड़ा युद्ध स्वयं से ही होता है जिसे हम आंतरिक संघर्ष कह सकते है।
मत पूछ की काब क्या है कांटो के रास्ते के बाद शांति का पड़ाव है धैर्य और परिश्रम से विजय छांव है वाणी अंतरात्मा चेतावनी देती है और संभालती है जीवन संदेश देता है कि जो अंत तक टिकता है, वही शांति पाता है जिसे हम खंड आशा और साधना कहते है।
केवल भोलेपन से जीवन नहीं जीता जा सकता और आँखें खुली रखनी होंगी, विवेक जागृत रखना होगा क्योंकि विपत्ति छल अज्ञान असावधानी बुद्धि विवेक में शत्रु छिपे होते है और छुपे हुए शत्रु जीवन को बहुत विपत्तियों से नवाजते है!
जब मन डूबने लगता है तभी शिव चेतना दिखाई देते हैं क्योंकि यह जीवन संघर्षों से भरा है संकट में ईश्वर और आत्मचिंतन सहारा बनते हैं धैर्य, विवेक और चेतना से ही पार पाया जा सकता है।
प्रतीकात्मक भाषा डूबना, सागर, कांटे, शंकर आध्यात्मिक दर्शन का प्रतीकात्मक भाषा डूबना, सागर, कांटे, शंकर है और अनुभूति प्रधान भाव की गहराई क्योंकि जीवन-संघर्ष में ईश्वर, गुरु और आत्मा की शरण का सुंदर दर्शन है। हतोत्साहित नहीं करती, बल्कि जगाती है और भाव, आस्था और अनुभव मनुष्य का सुंदर संगम है।
दिल से निकलने वाले शब्द अनुभव बन जाते है और संवेदना से समझने वाले को संवेदनशील जीवन के संघर्ष, संकट और मानसिक डूबन को दर्शाता है। कठिन परिस्थितियों में मनुष्य ईश्वर, आत्मा और विवेक की शरण लेता है। जीवन का मार्ग कष्टों से भरा है, पर धैर्य, परिश्रम और जागरूकता से शांति व विजय प्राप्त होती है। संदेश यह है कि जब मन डगमगाता है, तभी बड़ी सोच और आस्था जीवन को पार लगाती है।
डूबना केवल शारीरिक नहीं है, बल्कि यह मानसिक, भावनात्मक और आध्यात्मिक संघर्ष का संकेत है। यह जीवन में आए गहरे संकट का प्रतीक बनकर उभरता है। जब मनुष्य टूटने लगता है, तब वह बड़ी सोच, यानी ईश्वर, गुरु और आत्मचिंतन की ओर मुड़ता है।
शिव संहार नहीं बल्कि कल्याण और चेतना के देव हैं। संकट के समय मन ईश्वर की शरण लेता है। गंगासागर जीवन का प्रतीक हैएक ऐसा सागर जो पवित्र स्थल के साथ-साथ गंगा नदी और समुद्र से मिलता है। यह जीवन में शुद्धि, पुण्य और अनंतता का संकेत देता है।
गंगासागर जीवन असीमित है। इसमें अनुभव, ज्ञान, पुण्य और चुनौतियाँ भरी हुई हैं। जीवन के अलग-अलग अनुभव, रिश्ते और भावनाएँ अंततः आत्मा और ज्ञान तक पहुँचने का मार्ग बनते हैं।
जीवन सहज नहीं है। दुख, संकट और विपत्तियाँ निरंतर आती रहती हैं। सुख क्षणिक है, संघर्ष स्थायी। यही जीवन की वास्तविकता है संघर्ष से भागा नहीं जा सकता।
जीवन का मार्ग अक्सर कंकड़, पत्थर और चट्टानों से भरा होता है।दिल डरता है, रास्ता टेढ़ा लगता है, मन आकुल होता है। पर उसी संघर्ष में छिपी होती है शांति। आत्मा पुकारती है, रूह मार्ग दिखाती है। टकराव और संघर्ष अजीब होते हैं, पर सबसे बड़ा युद्ध स्वयं के भीतर होता है इसी को हम आंतरिक संघर्ष कहते हैं।
मत पूछो कि कांटे भरे रास्ते के बाद क्या मिलेगा। धैर्य और परिश्रम से ही विजय, शांति और छाँव मिलती है। वाणी और अंतरात्मा चेतावनी देती है और संभालती है। जीवन संदेश देता है कि जो अंत तक टिकता है, वही शांति पाता है। इसे हम खंड आशा और साधना कहते हैं।
केवल भोलेपन से जीवन नहीं जीया जा सकता। आँखें खुली रखनी होंगी, विवेक जागृत रखना होगा। क्योंकि विपत्ति, छल, अज्ञान और असावधानी में बुद्धि और विवेक के भीतर शत्रु छिपे होते हैं। यही छिपे हुए शत्रु जीवन में कई विपत्तियाँ लाते हैं।
जब मन डूबने लगता है, तभी शिव चेतना दिखाई देती है। जीवन संघर्षों से भरा है। संकट में ईश्वर और आत्मचिंतन सहारा बनते हैं। केवल धैर्य, विवेक और चेतना से ही इन्हें पार किया जा सकता है।
संघर्ष से शांति तक जीवन की सीख है और कांटो से भरे रास्ते पर अंत तक चलना की शांति की प्रतीक है!
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