यह गीत एक ऐसे साधक की करुण पुकार है जो माँ ईश्वरीय शक्ति जननी के मार्ग से भटक जाने के कारण जीवन में दिशाहीन और दुखी हो गया है। कवि स्वीकार करता है कि उसके दुःखों का मूल कारण कोई बाहरी परिस्थिति नहीं, बल्कि उसकी अज्ञानता, आत्महीनता और विवेक का अभाव है। गीत में माँ को परम शक्ति, पालनहार और करुणामयी मार्गदर्शिका के रूप में देखा गया है, जबकि स्वयं को एक असमर्थ बालक मानकर कवि पूर्ण समर्पण व्यक्त करता है। माँ से वह सांसारिक वैभव नहीं, बल्कि बल, बुद्धि, आत्मज्ञान और भक्ति की याचना करता है ताकि वह फिर से सही मार्ग पर लौट सके।समग्र रूप से यह रचना आत्मबोध, पश्चाताप और भक्ति का गीत है, जो यह संदेश देती है कि माँ के पथ से जुड़कर ही जीवन में स्थिरता, शक्ति और शांति प्राप्त होती है, और अज्ञान से मुक्ति ही सच्चा उद्धार है। भक्ति शक्ति आराधना प्रार्थना भजन कीर्तन अर्चन गीत, तेरे पथ से बिछड़कर मै दरबदर हो जा रहा हूँ, Tere Path Se Bichhadakar Main Darabadar Ho Ja Raha Hoon, Writer ✍️ #Halendra Prasad
#Tere Path Se Bichhadakar Main Darabadar Ho Ja Raha Hoon
Writer ✍️ #Halendra Prasad
BLOGGER=} 🙏♥️ #मेरी_हृदय_मेरी_माँ ♥️🙏
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ये तेरी कैसी डगर माँ मैं कहा जा रहा हूँ
तेरे पथ से बिछड़कर मै दरबदर हो जा रहा हूँ
सारी दुनियां में जो तेरी भक्ति है माँ
तूही परमात्मा की शक्ति है माँ
मेरे दुःख का कारण जो है माँ वो है अज्ञानता मेरी
मैं हूँ अनपढ़ सिपाही ना ज्ञान है तेरी
मेरे मन में ना कोई है ज्ञान का कौशल
मैं हूँ मूर्ख अनाड़ी ना मुझमें कुशल का हुनर
ये तेरी कैसी डगर माँ मैं कहा जा रहा हूँ
तेरे पथ से बिछड़कर मै दरबदर हो जा रहा हूँ
मेरे तन मन की गुणों की शक्ति तू माँ
मैं हूँ तेरा खेलवना तू मेरी भक्ति है माँ
काम करता चलू बात सुनता चलू
आँख ग़म से भरे तो मैं रोता चलु
कैसे पाऊं मैं तेरी आँचल की वो छांव
जहां बचपन गुजारा मैं बनकर परछाई हरदम
ना है क्षमता मुझमें ना कुशलता मुझमें
कैसे लाऊं सहजता ना बुद्धि मुझमें
ये तेरी कैसी डगर माँ मैं कहा जा रहा हूँ
तेरे पथ से बिछड़कर मै दरबदर हो जा रहा हूँ
ये मेरी शक्ति तुम्हारी अमानत है माँ
मैं जो चलता हूँ पग पग वो तेरी तिजारत है माँ
भूल जाना ना मुझको तू दिल में बसाकर
मै ढूंढता हूँ तुझको माँ दिल से लगाकर
जान मेरी जो है माँ वो तेरी दया है
कहती जो आत्मा वो मन भी कहता है
मेरे ध्यान में जो आकर तु मुझको संवारा करती
याद बचपन का देकर रुलाया करती
ये तेरी कैसी डगर माँ मैं कहा जा रहा हूँ
तेरे पथ से बिछड़कर मै दरबदर हो जा रहा हूँ
कारण दुखों का माँ लाता है ग़म
जाता है खुशियां दिखाता सितम
आत्म हीनता बढ़ती जब अज्ञानता छाती
आत्म ज्ञानों के मूल पे वो शक्ति ना आती
ताकत मुझमें भर दे बल बुद्धि दे दे
तन की वीरता सजाकर तू भक्ति भर दे
तेरे पास में जो रखा सशस्त्र की सज्जित
देदो मुझको तू अपना आशीष की शक्ति
ये तेरी कैसी डगर माँ मैं कहा जा रहा हूँ
तेरे पथ से बिछड़कर मै दरबदर हो जा रहा हूँ
गीत =} #तेरे पथ से बिछड़कर मै दरबदर हो जा रहा हूँ
#Tere Path Se Bichhadakar Main Darabadar Ho Ja Raha Hoon
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