यह गीत गुरु-तत्व सार्वभौमिक चेतना की महिमा का भावपूर्ण वर्णन है। कवि अपने अबोध हृदय को गुरु के उपदेश और ज्ञान से सजाने की प्रार्थना करता है। गुरु को आंतरिक प्रकाश, मार्गदर्शक और नीति-निर्देशक के रूप में प्रस्तुत किया गया है, जो संकट, अज्ञान और अंधकार में सही दिशा दिखाता है। गुरु-कृपा से मन शुद्ध होता है, बुद्धि स्थिर होती है और व्यक्ति पाप से बचकर सत्य व धर्म के मार्ग पर चलता है। यह रचना बताती है कि सच्चा गुरु भीतर निवास करने वाला चेतन तत्व है, जो जीवन को सार्थक, संतुलित और प्रकाशमय बनाता है। भक्ति शक्ति आराधना प्रार्थना भजन कीर्तन अर्चन गीत, मेरा दिल है अबोध इसको उपदेश से सजा दो गुरुवर, #Mera Dil Hai Abodh Isako Upadesh Se Saja Do Guruvaar, Writer ✍️ #Halendra Prasad,
गीत =} #मेरा दिल है अबोध इसको उपदेश से सजा दो गुरुवर
#Mera Dil Hai Abodh Isako Upadesh Se Saja Do Guruvaar
Writer ✍️ #Halendra Prasad
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की अपने ज्ञान के पिटारा से मुझे भरदो गुरुवर
मेरा दिल है अबोध इसको उपदेश से सजा दो गुरुवर
जीवन को दिशा तुम देदो बनकर मार्गदर्शक
अन्तर में रहते हो मेरे बनकर ज्योतिष हरदम
गुप्त रूप में रहते हो आप याद हमको आते
बाहरी गुरु का छाया हृदय में विराजे
आत्मा का पथ है आप बड़ा सलाहकार है
नीति निर्देशक मेरा नेताजी हमार है
की अपने ज्ञान के पिटारा से मुझे भरदो गुरुवर
मेरा दिल है अबोध इसको उपदेश से सजा दो गुरुवर
हे मेरे गुरुवर मेरे हृदय का प्रकाश आप
जीवन की धारा तुम हो जीवन का आधार आप
आत्मा में स्थिर रहते ज्ञान के तुम बीज हो
साधक के भीतरी सत्य का तुम्हीं नवनीत हो
गुरु तत्व की बीज भरदो अलख जगादो तुम
धीरे धीरे साधन को फूल सी बना दो तुम
घटन दुर्घटना हालत दुर्दशा बिगड़ जाता जब
मदद करने आ जाओ तुम याद तेरी आती गम
की अपने ज्ञान के पिटारा से मुझे भरदो गुरुवर
मेरा दिल है अबोध इसको उपदेश से सजा दो गुरुवर
कृपा तेरी बरसे जब जब फूल मुस्काता है
दिल में बहार भरकर दिल को हंसाता है
आंधी अंधकार में गुरुवर रास्ता दिखाता
कोई ना समझाए दिल को फिर भी समझ जाता
जब जब संकट आते मन शान्त होकर रहता है
ढूंढता उपाय संशोधन करके करता है
तेरी चेतना की गुरुवर तत्व बड़ी अजीब है
भीतर में अंतरंग भरता रिश्ता बड़ी गहरी है
की अपने ज्ञान के पिटारा से मुझे भरदो गुरुवर
मेरा दिल है अबोध इसको उपदेश से सजा दो गुरुवर
तेरी कृपा की रूप अंतर रूप की धारा है
सच्चा सच्चा ज्ञान है गुरुवर सच्चा ही सहारा है
अन्दर में विराजे मेरे तत्व बनकर बस्ता
शुद्ध करता तन मन को विचारों को बताता
चित्र चरित्र गुण सब कुछ सुधारे
मन की दशा को बोलकर आँखो में उभारे
ऐसा निष्कर्ष देता निश्चित कर देता है
कोई ना डिगाता इसकी बुद्धि भर देता है
की अपने ज्ञान के पिटारा से मुझे भरदो गुरुवर
मेरा दिल है अबोध इसको उपदेश से सजा दो गुरुवर
बल बुद्धि शक्ति भरकर ज्ञान को दिखाता
रोक देता पाप को ये धर्म को बताता
रुक जाता मन मेरा बुरा ना कर पाता
तेरी प्रेरणा प्रभु दिल को समझता
भर देता सचेत मन में हृदय को जगाकर
बढ़ता उत्साह हिमत दिल को लगाकर
गुर तत्व की बाणी तेरी अजबे निराली
पानी जैसा बरसे ज्ञान फूल की है क्यारी
की अपने ज्ञान के पिटारा से मुझे भरदो गुरुवर
मेरा दिल है अबोध इसको उपदेश से सजा दो गुरुवर
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#Mera Dil Hai Abodh Isako Upadesh Se Saja Do Guruvaar
Writer ✍️ #Halendra Prasad
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