यह गीत मौन में बसे मातृत्व और दिव्य अनुभूति का काव्यात्मक सार है। कवि बिना नाम पूछे, बिना शब्दों के, माँ-तत्व से जुड़ जाता है। यह संबंध संवाद का नहीं, अहसास का है। आगमन और विदाई दोनों ही चुपचाप घटते हैं, पर उनका प्रभाव हृदय में स्थायी रहता है। शब्द, ज्ञान और बुद्धि यहाँ असमर्थ हैं; केवल भावना और चेतना ही सच्चा सत्य प्रकट करती हैं। सुख-दुख आते-जाते रहते हैं, किंतु माँ की स्मृति मार्गदर्शक बनकर भीतर बस जाती है। विदाई अंत नहीं, बल्कि नया प्रकाश और नया वर्ष लेकर आने वाला आशीर्वाद है। भक्ति शक्ति आराधना प्रार्थना भजन कीर्तन अर्चन गीत, की कुछ तुमसे पूछा ना मैं ना नाम बताया, Kee Kuchh Tumase Poochha Na Mai Na Naam Bataaya, Writer ✍️ #Halendra Prasad,
#Kee Kuchh Tumase Poochha Na Mai Na Naam Bataaya
Writer ✍️ #Halendra Prasad
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की कुछ तुमसे पूछा ना मैं ना नाम बताया
भाव मौन की गहराई में छुपी थी ना विदाई कर पाया
आगमन का सूक्ष्म दर्शन संकेत बनकर छाया
कैसे भुलाए तू जो यदा बनकर आया
कोमल भावना थी तेरी संवाद और विदाई
आने जाने वालों में उलझा मैं अज्हुराई
एक दूसरे के निकट खड़े थे तुम प्यार में
देखता ये आँखें मेरी बोल ना पाता आभार में
की कुछ तुमसे पूछा ना मैं ना नाम बताया
भाव मौन की गहराई में छुपी थी ना विदाई कर पाया
शब्दों का सहारा अब ना काम दिल पे करता
ना कोई प्रश्न है ना कोई परिचयदिल से कहता
आत्मा की आत्मिक बाते बहुती करीब है
मन बुद्धि ज्ञान सब अज्ञान के गरीब है
भावों से भरकर भावना दिल को छू लेता है
भर देता आंखों को वो पानी गिर रहा है
छू लेता हृदय को जब वो भावुक कर देता
बोल नहीं पाता दिलवा आंख भर लेता
की कुछ तुमसे पूछा ना मैं ना नाम बताया
भाव मौन की गहराई में छुपी थी ना विदाई कर पाया
सुख दुख की बात क्या है आता जाता रहता है
अवलोकन से प्राप्त ज्ञान महसूस पर अटकता है
चेतना की समझ अब जान नहीं पाता
भावना की बोध अहसास को दिखाता
मन को छुटकर जाता है जो दिल में रह जाता
याद आता रह रह के तनिक ना सोहता
तूही बता दे मईया रास्ता दिखा दे
नया साल आया है दर्शन पेठा दे
की कुछ तुमसे पूछा ना मैं ना नाम बताया
भाव मौन की गहराई में छुपी थी ना विदाई कर पाया
जाती रही चुपचाप विदा मेरे पास से
देखता मैं पास से इस धुंधले आकाश में
बांधे ना शब्द अब इस अंधेरी रात में
देखता रहा मैं चुपचाप कुहारो की बरसात में
विदाई दर्शाती पग पग चलती जाती थी
आंखों में खुशी देकर नया साल लाती थी
भीतर की भावुकता मेरी मुझसे बोली है
विदाई सरल है उसकी असर गहरी थी
की कुछ तुमसे पूछा ना मैं ना नाम बताया
भाव मौन की गहराई में छुपी थी ना विदाई कर पाया
गीत =} #की कुछ तुमसे पूछा ना मैं ना नाम बताया
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