यह गीत मानव मन में व्याप्त दुःख, उदासी, अशांति और मानसिक पीड़ा का सजीव चित्रण करता है। कवि दिखाते हैं कि जीवन की कठिन घटनाएँ, इच्छाएँ, लालसा, अहंकार और निरंतर चिंता मन को व्याकुल कर देती हैं, जिससे व्यक्ति को हर ओर केवल दुःख ही दिखाई देता है। मन शांति को बाहर खोजता है, परंतु अपनी ही चंचलता और शोक के कारण उसे पा नहीं पाता।गीत का मूल भाव यह है कि दुःख का कारण बाहरी परिस्थितियाँ नहीं, बल्कि असंयमित मन और अंतहीन इच्छाएँ हैं। जब मन शोक, भय और चिंता में डूबा रहता है, तब शांति दूर हो जाती है। सच्ची शांति तभी मिलती है जब व्यक्ति आत्मचिंतन करे, मन को संयमित करे और इच्छाओं से ऊपर उठकर भीतर की शुद्धता और भक्ति को अपनाए शांति बाहर नहीं, अपने मन के भीतर है; उसे पाने के लिए मन को दुःख और इच्छाओं के बंधन से मुक्त करना आवश्यक है।भक्ति शक्ति आराधना प्रार्थना भजन कीर्तन अर्चन गीत, दिल में छाया है उदासी दुःख का पीड़ा बड़ी जोर दिखता, Dil Mein Chhaaya Hai Udasi Dukh Ka Pida Badi Jor Dikhata, Writer ✍️ #Halendra Prasad,
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Writer ✍️ #Halendra Prasad
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कैसे मिलेगा शान्ति का सुख सब ओर दिखता
दिल में छाया है उदासी दुःख का पीड़ा बड़ी जोर दिखता
जोर दिखता रे मईया जोर दिखता
अरे जोर दिखता रे मईया जोर दिखता
दिल में छाया है दिल में छाया है
दिल में छाया है उदासी दुःख का पीड़ा बड़ी जोर दिखता
दुखड़ा अफसोस रंज गम बड़ी जोर है
वेदना के पीड़ा में संताप दिल का चोर है
चिन्ता मनहूस करता गम के विषाद में
बढ़ते जाता दरद दिल में चाहत के प्यास में
कामना मनोकामना का घेरा अभिमान अब
लालसा की प्यास ने अब लेगया स्वाभिमान सब
कैसे मिलेगा शान्ति का सुख सब ओर दिखता
दिल में छाया है उदासी दुःख का पीड़ा बड़ी जोर दिखता
घटना दुर्घटना ने व्याकुल किया मन को
दिल के विलाप में सब लुट लिया तन को
बहने लगे आँसू आँख से दुःख बड़ी जोर था
दिल की पीड़ा से निकला शोक का भी शोक था
गहरा गंभीर दुर्गम गहन इसकी कष्ट थी
सहने वाला पागल होता पागल इसकी सत थी
कठिन समय का सेवक कठिन दुरूह था
आंधी के अंधकार में ये अजबे फितूर था
कैसे मिलेगा शान्ति का सुख सब ओर दिखता
दिल में छाया है उदासी दुःख का पीड़ा बड़ी जोर दिखता
मन बार बार ढूंढे उसको जहां जहां जाता है
करता परिक्रमा उसकी नाम जपते खाता है
चिन्तन के चतुराई में शोक शोक को बुलाता जब
लौट आता शोक जब दुखड़ा लेकर आता तब
भीतर के शान्ति को हरके विचलित करके रहता है
चिन्ता में घबराता मनवा शान्ति खोकर डरता है
भटकन भटक के रहो में जब भटका दिल का रोग
कर दिया बेचैन दिल को कैसा था संजोग
कैसे मिलेगा शान्ति का सुख सब ओर दिखता
दिल में छाया है उदासी दुःख का पीड़ा बड़ी जोर दिखता
दुख की घटना दुख को लाती शांतिको हर लेती है
काली काली रातों जैसा काली दिल कर देती है
व्याकुल मनवा व्याकुल होकर इधर उधर दौड़ जाता
दुख से दुखित होकर मनवा जहर जाम पी लेता
शोक की अग्नि जल जाती जब दिलको खूब जलाती
भर देती आँखों में आँसू पल पल में जल बरसाती
मन का रोग जाने ना कोई खिलवाड़ो की बस्ती में
धरती जलती तवा सामान आजादी के हस्ती में
कैसे मिलेगा शान्ति का सुख सब ओर दिखता
दिल में छाया है उदासी दुःख का पीड़ा बड़ी जोर दिखता
चँचल मन का रूप देखो तुम कैसे ये भरमाती है
बार बार पीड़ा को देखती पीड़ा में रुलाती है
डूब जाती गहराइयों में ये शान्ति सुख भागकर
अंतर के शान्ति को मारती दुःख की पीड़ा दिखाकर
दिल का मालिक बनाया जिसने सुख शान्ति को बेचा
अपने दिल को दग्ध किया है आजादी से रोका
दुख का दीप जलाया जिसने शान्ति कैसे आती
मन मन्दिर को धुआं बनाया खुशियां कैसे छाती
कैसे मिलेगा शान्ति का सुख सब ओर दिखता
दिल में छाया है उदासी दुःख का पीड़ा बड़ी जोर दिखता
गीत =} #दिल में छाया है उदासी दुःख का पीड़ा बड़ी जोर दिखता
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