यह गीत मनुष्य के अंतर्मन की पीड़ा, भावनात्मक जुदाई और माँ के प्रति गहरी आस्था को व्यक्त करता है। कवि बताता है कि जब शब्द असमर्थ हो जाते हैं, तब आँखें दिल की भाषा बोलती हैं। संसार अक्सर बाहरी हँसी देखता है, भीतर छिपे दर्द को नहीं समझ पाता। हर व्यक्ति अपने-अपने दुःख से जूझ रहा है—कोई रोकर, कोई हँसकर सहता है। रिश्तों में जल्दबाज़ी और आवेश से लिए गए निर्णय पीड़ा बढ़ाते हैं। इस सबके बीच माँ की ममता ही वह शक्ति है जो हर दर्द को समझती है और सांत्वना देती है। गीत का संदेश है कि संवेदना, करुणा और ममता ही सच्ची भक्ति और जीवन का सत्य हैं। भक्ति शक्ति आराधना प्रार्थना भजन कीर्तन अर्चन गीत, बोले आँखेंया दिलकी भाषा दिल जुदाई रे मईया, Bole Ankhiya Dilakee Bhaasha Dil Judaee Re Maiya, Writer ✍️ #Halendra Prasad,
गीत =} #बोले आँखेंया दिलकी भाषा दिल जुदाई रे मईया
#Bole Ankhiya Dilakee Bhaasha Dil Judaee Re Maiya
Writer ✍️ #Halendra Prasad
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की कोई समझें या ना समझें दिल दुहाई रे मईया
बोले आँखेंया दिलकी भाषा दिल जुदाई रे मईया
छिपकर हृदय में ये तो चेतना जगाती है
भावना संवेदना लेकर आँखो को रुलाती है
पीड़ा प्रेम के रिश्तों को ये तोड़ देती बातों से
दिल को झकझोर देती सच्चाई में रातों को
खड़ी है दुआर पे जैसे कोई खंजर आया है
आश्मा को चीरकर अब तो दिल पे काल छाया है
की कोई समझें या ना समझें दिल दुहाई रे मईया
बोले आँखेंया दिलकी भाषा दिल जुदाई रे मईया
हृदय का अनमोल ये दौलत मन में टीस भरता है
मन मन्दिर की शान्ति हरकर दुःख में सुन्दर लगता है
आत्मा परमात्मा दिखाई देते दिन में
भावना के सागर में डूबा देते रीत में
गहरी गहरी सांसें लेकर दिल ने दिल से बोला
कीमत है अनमोल इसकी आँखों से निरेखा
दिखती ना दुनियां को सच सच का पर्दा भारी है
पत्थर को पत्थर से मारा चिंगारी भी काली है
की कोई समझें या ना समझें दिल दुहाई रे मईया
बोले आँखेंया दिलकी भाषा दिल जुदाई रे मईया
सबके दुःख है अलग अलग माँ कोई यहां सुखी नहीं
कोई रोता बोलकर रोगवा कोई यहां दुःखी नहीं
चुपचाप जलता है कोई कोई हंसकर रोग छिपाता
दर्द होता है सबको मईया कोई हंसकर सह जाता
दिल की राज दिखे आँखें से आँख का कोई दोष नहीं
अश्क भरे बोलते है आँसू आँसू का कोई योग्य नहीं
जल फूल की रिश्ते को तुम देखो कीचड़ में खिल जाता है
अनमोल बन्धन को तोड़ देते लोग बन्धन भी झुक जाता है
की कोई समझें या ना समझें दिल दुहाई रे मईया
बोले आँखेंया दिलकी भाषा दिल जुदाई रे मईया
कोमल कोमल दिल को कोई समझे ना जल्द बाजी में
सुख के लिए तोड़ देते लोग बन्धन को आजादी में
कांप जाता जब दिल की हालत तनमन डांवाडोल होता
निर्णय के आवेश में मईया निर्णय भी मदहोश होता
जीवन का सब कड़वा सत कोई समझ ना पाता
अपनी अपनी जुबली गाता अपने में मर जाता
कभी कभी मन शांत ना होता कभी कभी इठलाता है
खुशियों के बहार में आकर पल पल में मुरझाता है
की कोई समझें या ना समझें दिल दुहाई रे मईया
बोले आँखेंया दिलकी भाषा दिल जुदाई रे मईया
दिल की हाल दिलों से पूछकर देखकर लोग हंस देते है
पानी कम है ज्यादा आँसू आँखो को भर देते है
सब जाने सब रोग की बातें कोई मूर्ख अनाड़ी ना
चोट देते सब दूसरों को कोई अपने आप खिलाड़ी ना
अपनी दुनियां अच्छी है तो सबकी दुनिया अच्छी है
ममता की सागर में मईया ममता ही तो भक्ति है
ज्ञानी ज्ञान बताता मईया अंधा आँख दिखता
तोड़ देती मंथरा ने घर को घर ही स्वर्ग दिखाता
की कोई समझें या ना समझें दिल दुहाई रे मईया
बोले आँखेंया दिलकी भाषा दिल जुदाई रे मईया
गीत =} #बोले आँखेंया दिलकी भाषा दिल जुदाई रे मईया
#Bole Ankhiya Dilakee Bhaasha Dil Judaee Re Maiya
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