गीत में लेखक ने कलयुग के यथार्थ और वर्तमान समाज की परिस्थितियों को दर्शाया है। इसमें बताया है कि आज का समय ऐसा है जहाँ दिल आसानी से टूटते हैं और रिश्ते कमजोर हो गए हैं। लोग अपनी खुशी के लिए अपनों को नजरअंदाज कर देते हैं।सुख का समय खत्म हो गया, दुःख और कठिनाइयाँ जीवन में घेर रही हैं।समाज में असली अपनापन और सच्चा प्यार कम हो गया है और लोग स्वार्थ और लालच में फँसे हैं जीवन में संघर्ष, पीड़ा और धोखा आम हो गया है। लेखक संदेश देते हैं कि बोलने से पहले सोच-समझकर बोलो। भक्ति शक्ति आराधना प्रार्थना भजन कीर्तन अर्चन गीत,आया कलयुग जमाना दिलवा खोलकर तोड़ो, Aaya Kalayug Jamaana Dilava Kholakar Todo, Writer ✍️ #Halendra Prasad,

 

गीत =} #आया कलयुग जमाना दिलवा खोलकर तोड़ो  

  #Aaya Kalayug Jamaana Dilava Kholakar Todo

           Writer ✍️ #Halendra Prasad 

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            बोलो बोलने से पहले तौल तौल के बोलो

         आया कलयुग जमाना दिलवा खोलकर तोड़ो 

         तेरी खुशी के खातिर कोई अपनो को छोड़े ना

         दिल है शीशा के जैसा उसको कोई मोड़ें ना

          सुख का ज़माना गया दुःख ने घर बनाया 

           हस के जुड़ाई आया अपना जड़ जमाया 

         जहर जैसा जीवन ना जहर क्यों समझते हो

      पी जाते हो खुशियां तुम खबर क्यों फिर रखते हो

          बोलो बोलने से पहले तौल तौल के बोलो

        आया कलयुग जमाना दिलवा खोलकर तोड़ो 


          सब है परदेशी यहां कोई ना है अपना

         पल भर के जीवन में पल है ना अपना

      भूल जाओ अपने को भुलाओ ना कैफियत 

        दौर है अब उनका जो सजाए है शोहरत 

           दिल की ये प्यासे अब प्रेम ना देती है 

           देती है ग़म को अब सफर ना देती है

        बसाए हो दिल में तो अब भटकना पड़ेगा

         पागल के जैसा तड़पकर दहकना पड़ेगा

         बोलो बोलने से पहले तौल तौल के बोलो

       आया कलयुग जमाना दिलवा खोलकर तोड़ो 


        पाले हो रोग जो वो जख्म बन गया है

      उमर भर का दर्द है अब सफर बन गया है

      जाओगे कहा तुम अब कौन यहां पूछेगा 

       हुस्न के बाजार में कौन तुम्हे निरेखेगा 

         जीने की चाहतों पे चाहत अजीब है 

        कोई ना गरीब यहां सब लोग अमीर है

       मांगो ना सहारा किसी गम मिल जाएगा 

  बिक रही है खुशियां धन से बेफिकर मिल जाएगा

      बोलो बोलने से पहले तौल तौल के बोलो

    आया कलयुग जमाना दिलवा खोलकर तोड़ो 


       भवर को तुम देखो कर किनारा ना होता

       डुबाता है उसको वो जो आवारा ना होता

           लहर ना डुबाती डुबाती है गुमसुम 

         हिलाकर मुआती है बताती ना हमदम

          कब तक जागोगे तुम कब ना सोवोगे 

           खबर देखकर सोवो सुबह ना उठोगे

         आसरा में जीवन अब कफ़न बन गया है

           जलने को आया है दहन बन गया है

         बोलो बोलने से पहले तौल तौल के बोलो

       आया कलयुग जमाना दिलवा खोलकर तोड़ो 

  गीत =} #आया कलयुग जमाना दिलवा खोलकर तोड़ो  

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