यह गीत एक भक्त और उसकी माँ की यादों की रातों की कहानी है जो भक्त अपनी मईया को याद करते-करते सारी रात गुज़ार देता है और आकाश की ओर बार-बार देखकर वह माँ को पुकारता है और थका मन माँ की स्मृतियों में शांति खोजता है। माँ हर पल प्रभात संध्या निद्रा और जागरण साधक की आत्मा में शक्ति बनकर उतरती है भक्त स्वयं को मिट्टी का गुड्डा मानकर पूरी तरह माँ के चरणों में अपने को समर्पित करता है भक्त रातों भर माँ के नौ रूप पाँच रूप और दिव्य शक्तियों का स्वरूप देखते रहता है अंततः माँ स्वयं प्रकट होकर बताती है कि मैं ही कालरात्रि दुर्गा प्रथम ज्योति और साधक की रक्षक हूँ । यह पूरा गीत माँ की प्यार भक्त की भक्ति का समर्पण और माँ से अदृश्य आत्मिक संबंध का मधुर भाव में प्रस्तुत करता हूँ!भक्ति शक्ति आराधना प्रार्थना भजन कीर्तन अर्चन गीत, देखूं बार बार मैं घुमकर इन आकाशों में, Dekhu Bar Bar Main Ghumkar In Aakasho Men, Writer ✍️ #Halendra Prasad,

     

  गीत=} #देखूं बार बार मैं घुमकर इन आकाशों में 

#Dekhu Bar Bar Main Ghumkar In Aakasho Men 

        Writer ✍️ #Halendra Prasad 

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                  राते ढल गई मईया तेरी यादों में 

              देखूं बार बार मैं घुमकर इन आकाशों में

              व्यर्थ की ये आशा मेरी मुझको लुभाया

             देख नहीं पाया मन मेरा मुझको रुलाया 

               मैं डर रहा हूँ कि माँ तुम डर रही हो

             हो गया सवेरा माँ तुम क्या कर रही हो

                 राते ढल गई मईया तेरी यादों में 

            देखूं बार बार मैं घुमकर इन आकाशों में


           थककर आया हूँ जब से सुध तेरी खाती है

           नीद नहीं आता मुझको याद तेरी आती है 

               घटना दुर्घटना है कि है मेरी माँ तू 

            आ जाती अचानक में माँ कैसी दया तू

       प्रातः काल में आती है माँ संध्या काल में आती है

      आती है तू बनके ताकत आत्मा में घुल जाती है

                राते ढल गई मईया तेरी यादों में 

           देखूं बार बार मैं घुमकर इन आकाशों में


            निंद में गिरा हूँ जबसे हाल ये बहाल है

            हार गया तुझसे मैया तू ना कसूरवार है

             राह तेरी छुटे ना माँ याद तेरी टूटे ना

           घर किया दिल पे मेरा दिल तुझसे पूछे ना

             रोक ना पाता हूँ मै अब तेरी यादों को

               रहती मन में मेरी बनकर हवा जो

               राते ढल गई मईया तेरी यादों में 

          देखूं बार बार मैं घुमकर इन आकाशों में


            मेरे समर्थ में ना है तुझे रोक पाना माँ 

        मैं हूँ माटी का गुड्डा मुझे ना छोड़ जाना माँ 

             भजते रहता हूँ माँ मैं तेरी विद्या को

            भूल नहीं जाना माँ तू अपनी प्रिया को

            तेरे पदचिन्ह को माँ मैं गले से लगाया 

          पग पग पे देखा मैं तुझे आँखों में बसाया 

               राते ढल गई मईया तेरी यादों में 

          देखूं बार बार मैं घुमकर इन आकाशों में


          कुच्छ ना तू करना माता साथ मेरे रहना 

        गंगा जैसा निर्मल रखना दिल में मेरे बसना 

           मैं तेरा ललला बनके तेरे पास रहूंगा

           मुझे मार देना माँ मै कुछ ना कहूंगा 

       पलकों के छांव में तेरे जिन्दगी बिताऊंगा

          सेवा करूंगा माँ मैं सुख नहीं चाहूंगा 

             राते ढल गई मईया तेरी यादों में 

        देखूं बार बार मैं घुमकर इन आकाशों में


           सोना ना चाहूं माँ मैं तेरा गीत सुनकर

          आती हो दिल में मेरे बनकर समन्दर 

         पांचों पहाड़ में माँ तू पांच रूप में रहती है

          कही काली दुर्गा है कही वेद पढ़ती है

          नव रूप में आती है तू नव रूप विराजे

            गंगा जमुना सरस्वती सब तेरे साथे 

             राते ढल गई मईया तेरी यादों में 

        देखूं बार बार मैं घुमकर इन आकाशों में


      सुबह की तू सूरज माता रात की काल रात्री 

           स्वागत में खड़ा है लेकर फूल शास्त्री

          मेरा मतवाला मन इन हवावो से पूछे 

          देखकर उत्पात इनका मुझको ना सुझे 

          तनकी अधीर करदे याद तेरी मुझको 

           सोंच में डूबा दे तू ध्यान तेरी मुझको

             राते ढल गई मईया तेरी यादों में 

         देखूं बार बार मैं घुमकर इन आकाशों में


        मेरी प्यारी प्यारी माँ मेरे प्राणों से तू प्यारी है

          मीठी मीठी बोली तेरी अजबे निराली है

          रुकता उम्मीद ना मेरा तेरे पास जाता 

           खड़ा हूँ मैं तेरे सामने दिल है बुलाता 

          यादों की आलोक में माँ मुझमें विराजे

       ज्ञान की झलक से माँ तू ज्योति को जला दे 

               राते ढल गई मईया तेरी यादों में 

         देखूं बार बार मैं घुमकर इन आकाशों में


             चीर दिया ज्योति तेरी मेरे निद्रा को

            हंस पड़ी अंधेरी राते देखकर हवा को

         शोक से तू मुक्त है माँ दुःख नहीं तेरे पास

             देख तू हृदय से मुझको मैं हूँ उदास 

       खोलकर नैनोंको जब माँ आयेगी मेरे पास में

            देखेगी हृदय को मेरा मेरे विलाप में

              राते ढल गई मईया तेरी यादों में 

         देखूं बार बार मैं घुमकर इन आकाशों में


          सुन सान राते मुझसे बार बार कहती है

         देख मेरे तपाक को तू यहीं तर्क करती है

           मैं हूँ वो काल रात्री मैं ही काली दुर्गा

           दृष्टि में बस्ती हूँ मैं बनके तेरी इच्छा

            मैं प्रथम रचना हूँ मैं प्रथम ज्योति

           तेरे संग रहती हूँ मैं बनकर तेरी रोटी 

              राते ढल गई मईया तेरी यादों में 

         देखूं बार बार मैं घुमकर इन आकाशों में

  गीत=} #देखूं बार बार मैं घुमकर इन आकाशों में 

#Dekhu Bar Bar Main Ghumkar In Aakasho Men 

        Writer ✍️ #Ha

lendra Prasad 

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