यह गीत मानव जीवन मृगतृष्णा प्रसिद्धि की चाह और गुरु कृपा की महता को एक साथ बांधता है गुरुवर जीवन के साक्षी और मार्गदर्शक है जो सिखाते है कि सच्ची प्रसिद्धि बाहरी नहीं है बल्कि आत्मा की पवित्रता में है। भक्ति शक्ति आराधना प्रार्थना भजन कीर्तन अर्चन गीत, गुरुवर आई इस दुनियां में तो दरबदर आई रे, Guruvar Aai Is Duniya Men To Darbadar Aai Re, Writer ✍️ #Halendra Prasad,

   

गीत =} #गुरुवर आई इस दुनियां में तो दरबदर आई रे

#Guruvar Aai Is Duniya Men To Darbadar Aai Re

           Writer ✍️ #Halendra Prasad 

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        ये मशहूर की ख़्वाईश जब आई तो अजब छाई रे

            गुरुवर आई इस दुनियां में तो दरबदर आई रे

               देखो इसकी चाहत कितनी मगरुर है 

              मार दिया अपनों को ये बहुत गमगूर है

          कौन किसको चाहे अब कौन किसे पहचाने 

             जिन्दगी की डोर सब मशहूर का है ताने 

              अच्छा ही तो अच्छा बुरा ही तो बुरा है

             मन की मलाल में सब जिंदगी अधूरा है

       ये मशहूर की ख़्वाईश जब आई तो अजब छाई रे

          गुरुवर आई इस दुनियां में तो दरबदर आई रे


             ज़िन्दगी आहे गम सब इसी में छुपा है

             फलसफा की विद्या भी इसी में बैठा है

         कितना अजीब है इसकी आँखों की नुमाइश 

          मार देता आह में जग को करता गुंजाइश

          कट नहीं पाती साम ये उमर ढल जाती है

       बिछड़ जाते विरह में लोग प्रेम जाग ना पाती है

            लीला रंग लीला जीवन कैसा मंजर है

            सारी खुशियों गम गुरु तेरा ये शहर है

       ये मशहूर की ख़्वाईश जब आई तो अजब छाई रे

         गुरुवर आई इस दुनियां में तो दरबदर आई रे


            जिन्दगी की दौड़ में ये जिन्दगी वीरान है

            जैसे भू भाग बंजर वैसा मन का सार है

            बीत जाता साल पूरा आती ना वो पल

             आती है हवाएं ऐसी लेजाती है कल

          हार जीत की छाया में लोग अर्जी लगाते

           कोई कुम्हलता है तो कोई खिल जाते

        फूलों को बहार के जैसा जिन्दगी की हाल है

          खिलता है पल के लिए पल ही बयार है

     ये मशहूर की ख़्वाईश जब आई तो अजब छाई रे

        गुरुवर आई इस दुनियां में तो दरबदर आई रे


        पीछे मुड़कर देखे ना कोई जिंदगी की सच्चाई 

         मिट्टी का तन है गुरूवर मिट्टी में मिल जाई 

      मुझको बड़ी अच्छी लगती तेरे चरणों के धाम में

          याद में बसे हो गुरुवर हृदय के आवाम में

         जीवन में जो करता लोग पूरा ना कर पाता

          जलता है आग जैसा दीपक ना बन पाता

        भक्ति भाव मन में रखकर लोभ में पड़ा जो

           पा ना सका दीक्षा वो नाम से खड़ा जो

     ये मशहूर की ख़्वाईश जब आई तो अजब छाई रे

        गुरुवर आई इस दुनियां में तो दरबदर आई रे

गीत =} #गुरुवर आई इस दुनियां में तो दरबदर आई रे

#Guruvar Aai Is Duniya Men To Darbadar Aai Re

           Writer ✍️ #Halendra Prasad 

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