संसार मनुष्य को उसके बाहरी रूप से पहचानता है परन्तु माँ उसके हृदय का सत्य जानती है। इसलिए सच्चा भक्त सत्य धैर्य और समर्पण के साथ ईश्वर की कृपा की प्रतीक्षा करता है। इस गीत का मुख्य संदेश है कि मनुष्य को संसार के आरोपों और अन्याय से विचलित हुए बिना सत्य धैर्य विनम्रता और ईश्वर के प्रति अटूट विश्वास बनाए रखना चाहिए। माँ की कृपा और न्याय पर भरोसा ही जीवन का सबसे बड़ा सहारा है। एक भावपूर्ण भक्ति-गीत है, जिसमें कवि अपनी पीड़ा सच्चाई और पूर्ण समर्पण को माँ के चरणों में अर्पित करता है। संसार के लोग उस पर झूठे आरोप लगाते हैं और उसे गलत समझते हैं किंतु भक्त को विश्वास है कि माँ उसके हृदय की सच्चाई को भली-भाँति जानती है। भक्त माँ से प्रश्न करता है कि जब वह सब कुछ देख रही है तो अन्याय के समय मौन क्यों रहती है। फिर भी वह शिकायत नहीं करता बल्कि धैर्यपूर्वक माँ के न्याय और कृपा की प्रतीक्षा करता है। उसे विश्वास है कि उचित समय पर सत्य की विजय होगी। आध्यात्मिक दार्शनिक अनमोल भक्ति शक्ति आराधना प्रार्थना भजन कीर्तन अर्चन गीत, मैं तो अनपढ़ मूढ़ भिखारी तेरे से कुछ पूछूं रे माई , #Mai To Anpadh Moodh Bhikhari Tere Se Kuchh Puchhu Re Mai, Writer ✍️ #Halendra Prasad
#Mai To Anpadh Moodh Bhikhari Tere Se Kuchh Puchhu Re Mai
Writer ✍️ #Halendra Prasad
BLOGGER=} 🙏♥️ #मेरी_हृदय_मेरी_माँ ♥️🙏
🙏❤️ #Meri_Hriday_Meri_Maa❤️🙏
ना मैं झूठा ना मैं मिथ्या ना मैं अनुचित सोचूं रे माई
मैं तो अनपढ़ मूढ़ भिखारी तेरे से कुछ पूछूं रे माई
मैं तो अनपढ़ मूढ़ भिखारी
लोग समझते दूषित मुझको मुझसे अब अठीलाते है
जो शुद्ध नहीं है जीवन में माँ वैसे दोष लगाते है
घोट देते है सच का गाला अपने को सच दिखाने में
स्वीकार करूं मैं कैसे मईया दिल का दाग मिटाने में
स्वीकार करूं मैं कैसे मईया
नफरत करते झूठ बोलते घृणा हमसे करते है
मार देते आरोप से मुझको लोग हमसे जलते है
हे माता तू शान्त बैठी है धीरे धीरे मुस्काती क्यों
देखकर मुझको चुप बैठी है दिल को मेरे रुलाती क्यों
ना मैं झूठा ना मैं मिथ्या ना मैं अनुचित सोचूं रे माई
मैं तो अनपढ़ मूढ़ भिखारी तेरे से कुछ पूछूं रे माई
सब जानती है मैया मोरी तुझसे ना कुछ छुपा रे
जो चलता है दिल में मेरे सबसे नाता टूटा रे
इस दुनियां के लोग माता न्याय करने में आगे है
देख ना पाते सच को दिल से दर्द देने में आगे है
सब देखती है माता तू इस दुनियां में होता जो
रोता बच्चा छूट जाता है कैसा है दुनियां का योग
ना मैं गुस्सा ना मैं हंसता ना मैं शिकायत करता हूँ
छोड़ दिया मैं तुझपे माता इंतजार करता हूँ
आँखों में नमी आती जब याद तुझे मैं करता हूँ
तेरे प्रेम की दुनियां में जीवन को अब रखता हूं
ना मैं झूठा ना मैं मिथ्या ना मैं अनुचित सोचूं रे माई
मैं तो अनपढ़ मूढ़ भिखारी तेरे से कुछ पूछूं रे माई
तेरी ये मुस्कान से माता मैं जो समझ पाता हूँ
याद आती है तू मुझको तुझको देख पाता हूँ
सच्चाई की सत्य कहानी जल्दी जल्दी दिखती ना
आता है थोड़े देर से मईया दरबदर भटकता ना
तेरे मधुर कहनी को मैं रच रच कर अब कहता हूँ
अपने अंतर की अमर रहस्य से अब चलता हूँ
जिसको तू रचती है माता वो अमृत की डाली है
ईश्वर की प्रकृति प्रिय जीवन की खुशहाली है
सुन्दर सुन्दर मधुर कहानी गीतों में तू कहती माँ
अमृत की डाली से अमृत तोड़ कर लाती माँ
ना मैं झूठा ना मैं मिथ्या ना मैं अनुचित सोचूं रे माई
मैं तो अनपढ़ मूढ़ भिखारी तेरे से कुछ पूछूं रे माई
जब तेरी गीतों की रचना मैं करता की खुशहाली से
मन के भाव बाहर आते है मुख के प्याली से
छिपी हुई गहरे भावों को लिख देता मैं दिल में
बाहर आती संवेदना रहस्य में बनके मुख से
दिल की मैं गहराइयों में जब देख लेता हूँ तुझको
प्रकट होते है झटपट स्वर गा लेता हूँ झट से
मेरे अंतर मन की भावना अब बार बार मुझे बोले
व्यक्त करे तेरे प्रेम को मईया आँख के आँसू डोले
तेरी प्रेम की सुन्दरता ने जब प्रेरित किया मुझको
आत्मा की गहराइयों को उजागर किया है दिल को
ना मैं झूठा ना मैं मिथ्या ना मैं अनुचित सोचूं रे माई
मैं तो अनपढ़ मूढ़ भिखारी तेरे से कुछ पूछूं रे माई
गीत =} #मैं तो अनपढ़ मूढ़ भिखारी तेरे से कुछ पूछूं रे माई
#Mai To Anpadh Moodh Bhikhari Tere Se Kuchh Puchhu Re Mai
Writer ✍️ #Halendra Prasad
BLOGGER=} 🙏♥️ #मेरी_हृदय_मेरी_माँ ♥️🙏
🙏❤️ #Meri_Hriday_Meri_Maa❤️🙏
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें