अहंकार का त्याग विनम्रता का स्वीकार और माँ के चरणों में समर्पण ही जीवन की सच्ची शांति और सुख का आधार है। इस गीत में कवि ने माँ के प्रति अपनी पूर्ण श्रद्धा समर्पण और भक्ति को व्यक्त किया है। कवि बताता है कि जीवन के अनुभवों ने उसे यह सिखाया कि अहंकार अभिमान और सांसारिक मोह केवल दुख देते हैं। इसलिए उसने अपने अहंकार का त्याग करके स्वयं को माँ के चरणों में समर्पित कर दिया। माँ की कृपा से विनम्रता सादगी शालीनता और जीवन का वास्तविक ज्ञान प्राप्त हुआ। अब वह समझ चुका है कि जीवन अस्थायी है जीत और हार दोनों जीवन का हिस्सा हैं तथा अभिमान मनुष्य के दुखों का प्रमुख कारण है। इसलिए कवि केवल माँ का ध्यान गुणगान और स्मरण करना चाहता है। कवि को विश्वास है कि एक दिन माँ उसे अपने प्रेम से अपनाएँगी और कवि की आत्मिक प्यास को शांत करेंगी। इसलिए कवि इस निष्कर्ष पर पहुँचता है कि संसार में सब कुछ क्षणभंगुर है जबकि माँ की शरण और भक्ति ही सच्ची शांति और आनंद का मार्ग है। आध्यात्मिक दार्शनिक अनमोल भक्ति शक्ति आराधना प्रार्थना भजन कीर्तन अर्चन गीत, अब तो सोता है मेरा दिल तेरे दिल के साथ में , #Ab To Sota Hai Mera Dil Tere Dil Ke Sath Me, Writer ✍️ #Halendra Prasad,
#Ab To Sota Hai Mera Dil Tere Dil Ke Sath Me
Writer ✍️ #Halendra Prasad
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खुद को सजा दिया मैं माँ तेरे चरणों में डाल के
अब तो सोता है मेरा दिल तेरे दिल के साथ में
स्वीकार किया मैं हार को अपना दुख की दिल कहानी थी
छोड़ दिया अहंकार को मैने जिसकी जीत जवानी थी
विनम्र बना मैं इस जीवन में छोड़ दिया सारे अह को
पल पल मुझको रुग्ण बनाती छोड़ दया उस धन को
तेरा मैं माँ ध्यान करु तेरा ही गुणगान करु
तेरे चरणों की पूजा करु मैं तूझसे ही मैं बात करु
खुद को सजा दिया मैं माँ तेरे चरणों में डाल के
अब तो सोता है मेरा दिल तेरे दिल के साथ में
अनुभव की दुनियां में माँ मैं चलकर जब देखा
सिख गया उस शिष्टता को मैं जब सादगी से प्रेम किया
शालीनता कोमलता मिली मिली जीवन की नम्रता
भर दया मुझे नरमी से माँ जिससे प्रेम किया
मन ने मुझको भ्रमित किया था अपनी मन की बातों से
जितने का अहंकार दिया था चाहत की वो यादों से
मेरे बल बुद्धि से बाहर है जो जितने का अहंकार दिया
छोड़ दिया उस डाली को मै जिसने मुझको काट दिया
खुद को सजा दिया मैं माँ तेरे चरणों में डाल के
अब तो सोता है मेरा दिल तेरे दिल के साथ में
सीमित है यह जीवन माता हर समय ना जीतेगा
कभी टूटेगा कभी जुटेगा हरदम दुखी रहेगा
मैं जानू अपने को माता मैं ना वो घमंडी हूँ
दुख मिले दूसरे को माता मैं ना वो फिरंगी हूँ
जीवन का एहसास मुझे माँ खुद ही मुझे बताया
अभिमान जीवन का दुख है माँ आकर वो समझाया
कितना सुन्दर हार है माता मुझको विनम्र बना दिया
मार दिया अहंकार मेरे मुझको नया जीवन दिया
खुद को सजा दिया मैं माँ तेरे चरणों में डाल के
अब तो सोता है मेरा दिल तेरे दिल के साथ में
तोड़ दिया घमंड की चाहत अब ना उसे अपनाता मै
चलता हूँ तेरे साथ में मईया अब ना उसे दुखता मै
चाह मेरी एक ऐसी माता दर्शन तेरी मिल जाती
दिल की अरमा पूरी होती माँ दिल मेरा अब खिल जाती
आश लगाकर बैठा हूँ मैं एक दिन मिलने आएगी
गले लगाकर मुझको माता मेरी प्यास बुझाएगी
इस जीवन को देखा मैं माँ यहां भ्रम की होड़ मची
सब आए है खाली हाथ पाने की सब जोर लगी
खुद को सजा दिया मैं माँ तेरे चरणों में डाल के
अब तो सोता है मेरा दिल तेरे दिल के साथ में
गीत =} #अब तो सोता है मेरा दिल तेरे दिल के साथ में
#Ab To Sota Hai Mera Dil Tere Dil Ke Sath Me
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