मानसिक बोझ छोड़कर सकारात्मक बना जा सकता है और वर्तमान में जीकर सच्चा सुख पाया जा सकता है क्योंकि यह रचना सिखाती है कि पुरानी दुखद यादों और मानसिक बोझ को पकड़कर बैठने से केवल दुःख ही मिलता है। मन स्वभाव से चंचल है इसलिए उसे खाली छोड़ने के बजाय अच्छे और सकारात्मक कार्यों में लगाना चाहिए। बीती हुई बातों अपमान और पीड़ा को बार-बार याद करने से मन अशांत होता है इसलिए उन्हें भूलकर आगे बढ़ना ही बुद्धिमानी है गीत यह भी बताती है कि मन को अनुशासन और सकारात्मक सोच से बदलकर जीवन में शांति संतोष और सुख पाया जा सकता है। जो बातें लाभकारी और सुखद हों उन्हीं पर ध्यान देना चाहिए। आध्यात्मिक दार्शनिक अनमोल भक्ति शक्ति आराधना प्रार्थना भजन कीर्तन अर्चन गीत, काहे बैठे हो पकड़कर बड़ी दुःख पाओगे, #Kahe Baithe Ho Pakadkar Badi Dukh Paoge, Writer ✍️ #Halendra Prasad,
#Kahe Baithe Ho Pakadkar Badi Dukh Paoge
Writer ✍️ #Halendra Prasad
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छोड़ दो मानसिक बोझ बढ़ाना बड़ी सुख पाओगे
काहे बैठे हो पकड़कर बड़ी दुःख पाओगे
मन बड़ा चँचल है इधर उधर जाता
पल में बदलता है पल पल में आता
अच्छे कर्मों में मन को दिल से लगाओ
काम दे दो करने को इसे ना बहलाओ
लाभकारी काम देदो देदो सोच विचार को
देदो विश्वास इसको आत्मा निर्माण को
कुछ नया करेगा कुछ तो सुधारेगा
पानी जैसा निर्मल होकर दिल को फुहारेगा
छोड़ दो मानसिक बोझ बढ़ाना बड़ी सुख पाओगे
काहे बैठे हो पकड़कर बड़ी दुःख पाओगे
दुखद यादों को याद करो ना भूला दो
बात है पुरानी इसको मिट्टी में दफना दो
मामला प्रकरण को तुम याद नाही करो
दुख पहुंचाने वाले को मुंह में आग भरो
धीरे धीरे याद आता मन को विचलाता है
जज में समाकर वो स्वीकार हो जाता है
जो भी हुआ भूल जाओ मन में ना आने दो
छोड़ दो यादों को अब दिल को खिल जाने दो
मन को बदल कर अच्छे काम को लाओ
छोड़ दो पुरानी बातें यादों को जलाओ
छोड़ दो मानसिक बोझ बढ़ाना बड़ी सुख पाओगे
काहे बैठे हो पकड़कर बड़ी दुःख पाओगे
अब ना कोई जार्ज करो तुम ध्यान लगाकर देखो
अनुभव को तुम वहां लगाओ जहां प्रेम को पाओ
बदल डालो तुम मन को अपना धीरे धीरे बदलों
ऊर्जा को सकारात्मक करदो सावन जैसा बरसो
भुला डालो उस गर्त की बातें जो पीड़ा में रहती
मन से कह दो भुला दिया मैं तेरी जरूर ना पड़ती
मैं देता अब शान्ति मानकों अपने पास बुलाकर
देता हूँ प्रशिक्षण उसको अनुशासन बतलाकर
कमजोर करो तुम उन यादों को जिसने तुम्हे रुलाया
धीरे धीरे मार डालो तुम जिसने तुम्हे तड़पाया
छोड़ दो मानसिक बोझ बढ़ाना बड़ी सुख पाओगे
काहे बैठे हो पकड़कर बड़ी दुःख पाओगे
मन को स्थिर करलो तुम शुद्ध स्वस्थ की राहों में
चोट पुरानी दुःख देती है याद करो ना अनजाने में
मानसिक बोझ बढ़ाता है जब यादों में आता है
पकड़कर काहे बैठे हो तुम अपना दिल जलाना है
छोड़ देना सुख शान्ति है भाई जीवन का अनमोल रत्न
मन को मन से जान लेना भाई मन का है प्रेम सफर
केंद्रित कर लो उन अनुभव को जो सकारात्मक लाता है
जीवन को भी स्वस्थ बनाता सन्तोष प्रेम पिघलाता है
कितने जीवन मिट गए है चिन्ता और चतुराई में
कर ना पाए मन को हल्का यादों की जुदाई में
छोड़ दो मानसिक बोझ बढ़ाना बड़ी सुख पाओगे
काहे बैठे हो पकड़कर बड़ी दुःख पाओगे
अपमानजनक घटनाओं को तुम मन में अब ना आने दो
याद करो ना बार बार अब उसे तुम भूल जाने दो
जब जब याद आती है बातें कुछ ना वो कर पाता
मानसिक रोग बढ़ाता है मन को है इठलाता
याद करो तुम उन बातों को जो सुख शान्ति लावे
लाभकारी की बात कहे वो जीवन को समझावे
भुलजाना है श्रेष्ठ का गुणें ना कोई अपमान
मानसिक भावना को ठीक रखे स्वस्थ रहे बुद्धिमान
रुचि ना रख पावों उसमें जो लाभकारी होता ना
बहुत जरूरी होता है जो भावना लाभकारी ना
छोड़ दो मानसिक बोझ बढ़ाना बड़ी सुख पाओगे
काहे बैठे हो पकड़कर बड़ी दुःख पाओगे
गीत=} #काहे बैठे हो पकड़कर बड़ी दुःख पाओगे
#Kahe Baithe Ho Pakadkar Badi Dukh Paoge
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